
रीवा। रीवा जिले के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अनंतपुर में तीन इंच जमीन प्लास्टर और पेड़ विवाद से शुरू हुआ मामला अब पूरे जिले में राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन चुका है। सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी द्वारा दो बार आत्महत्या की कोशिश किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है जबकि दूसरा पक्ष इसे पुलिस पर दबाव बनाने और खुद को बचाने की रणनीति बता रहा है। पूरे घटनाक्रम ने जिले में सनसनी फैला दी है।
जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा को उस समय फोन आया जब वे एक मामले में न्यायालय में मौजूद थे। कॉल करने वाले ने कहा कि पड़ोसियों ने उसके माता-पिता के साथ मारपीट की है और वह आत्महत्या करने जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत कराया और सीधे मौके के लिए रवाना हो गए।
मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस को कॉल करने वाला व्यक्ति नहीं मिला लेकिन दोनों पक्षों के बीच विवाद और तनाव की स्थिति जरूर थी। बताया जा रहा है कि पहले तीन इंच जमीन को लेकर विवाद हुआ था बाद में दीवार में प्लास्टर कराने को लेकर झूमाझटकी शुरू हो गई। थाना प्रभारी ने सूझबूझ दिखाते हुए दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाइश देने का प्रयास किया। निशांत मिश्रा अपने परिजनों के साथ थाने पहुंचे जहां पुलिस ने पहले आपसी समझौते की सलाह दी लेकिन जब मामला नहीं सुलझा तो शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई।
इसी बीच दूसरा पक्ष पुलिस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए सामने आया। सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित बताया। गुरुवार को उन्होंने अपनी कलाई की नस काट ली थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को होश आने पर उन्होंने परिवार से पूछा कि आरोपियों पर कार्रवाई हुई या नहीं। जब उन्हें बताया गया कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है तो वे फिर निराश हो गए और जहर खाकर दूसरी बार आत्महत्या की कोशिश कर ली। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
इस पूरे मामले ने नया मोड़ तब लिया जब शिक्षक द्वारा लिखा गया पांच पन्नों का सुसाइड नोट सामने आया। नोट में उन्होंने विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र शर्मा और पत्रकार निशांत मिश्रा उर्फ अंकित पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें फर्जी मामले में फंसाकर उनकी 28 साल की साफ-सुथरी नौकरी पर दाग लगाने की कोशिश की गई। सुसाइड नोट में कॉल डिटेल जांच और उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की गई है।
शिक्षक के बेटे ने आरोप लगाया कि विवाद की शुरुआत एक हरे-भरे पेड़ को काटने से हुई थी। विरोध करने पर उनके पिता को धमकियां दी गईं और बाद में पुलिस की मदद से फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। वहीं बेटी प्रिया तिवारी ने भावुक आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा परिवार पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगाते-लगाते टूट चुका है।
हालांकि स्थानीय लोगों का एक वर्ग इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहा है। लोगों का कहना है कि यदि शिक्षक पक्ष की मंशा केवल शिकायत करने की होती तो वे सीधे थाने पहुंचते लेकिन लालगांव से आने के बाद पहले विवाद स्थल पर जाकर प्लास्टर का काम रुकवाया गया जिससे विवाद और बढ़ गया। ऐसे में पुलिस ने मौके की स्थिति के आधार पर कार्रवाई की लेकिन अब उसी कार्रवाई को लेकर पुलिस और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में पुलिस ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की या फिर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पूरे मामले को आत्महत्या और भावनात्मक दबाव का रूप दिया जा रहा है।





