प्राचार्य कक्ष के ‘शुद्धिकरण’ के आरोप पर विवाद, भीम आर्मी का प्रदर्शन; प्रभारी प्राचार्य ने कहा- आरोप बेबुनियाद

स्कूल के पूर्व प्राचार्य के रिटायरमेंट के बाद प्रभारी प्राचार्य द्वारा कार्यालय में पूजा-अर्चना का वीडियो सामने आने से विवाद खड़ा हो गया है। भीम आर्मी ने इसे कथित सामाजिक भेदभाव से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि प्रभारी प्राचार्य ने शुद्धिकरण के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
पूर्व प्राचार्य के रिटायरमेंट के बाद बढ़ा विवाद
स्कूल के प्राचार्य रामसखा वर्मा 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वरिष्ठ शिक्षक रामसखेंद्र द्विवेदी को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी दौरान प्राचार्य कक्ष में पूजा-अर्चना का एक वीडियो सामने आया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
भीम आर्मी कार्यकर्ताओं का दावा है कि वीडियो 1 अक्टूबर का है, जबकि प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि यह वीडियो 5 अक्टूबर का है और पदभार ग्रहण के मौके पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान बनाया गया था।
वीडियो में पूजा-अर्चना करते दिखे प्रभारी प्राचार्य
वायरल वीडियो में प्राचार्य कक्ष की कुर्सी पर मां सरस्वती की तस्वीर रखी दिखाई दे रही है। प्रभारी प्राचार्य रामसखेंद्र द्विवेदी पूजा-अर्चना करते और हाथ में जलपात्र लेकर कमरे में जल का छिड़काव करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान स्कूल के कुछ कर्मचारी भी कमरे में मौजूद दिखाई देते हैं।
वीडियो सामने आने के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता स्कूल परिसर के बाहर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
भीम आर्मी ने लगाया ‘शुद्धिकरण’ का आरोप
भीम आर्मी कार्यकर्ता सिद्धार्थ नालंदा ने आरोप लगाया कि पूर्व प्राचार्य अनुसूचित जाति वर्ग से आते थे। उनके रिटायर होने के बाद नए प्रभारी प्राचार्य ने कुर्सी और पूरे प्राचार्य कक्ष का कथित तौर पर गौमूत्र और गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ कराया।
संगठन ने इसे दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा और मामले की जांच कराने की मांग रखी।
प्रभारी प्राचार्य ने आरोपों को बताया निराधार
प्रभारी प्राचार्य रामसखेंद्र द्विवेदी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि 30 सितंबर को पूर्व प्राचार्य रामसखा वर्मा का सम्मानपूर्वक विदाई समारोह हुआ था और उन्होंने विधिवत प्रभार सौंपा था।
द्विवेदी के मुताबिक, 5 अक्टूबर को स्कूल पहुंचने पर स्टाफ ने पदभार ग्रहण करने के अवसर पर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान मां सरस्वती की तस्वीर रखकर सामान्य पूजा-अर्चना की गई।
बोले- पूजा के जल का ही किया गया छिड़काव
प्रभारी प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि पूजा के दौरान अर्पित किए गए जल का ही कमरे में छिड़काव किया गया था। उन्होंने किसी भी तरह का शुद्धिकरण कराने या किसी व्यक्ति अथवा समुदाय के प्रति भेदभाव करने से इनकार किया।
उनका कहना है कि वायरल वीडियो को आधार बनाकर लगाए जा रहे शुद्धिकरण के आरोप मनगढ़ंत और निराधार हैं।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
इस मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। भीम आर्मी जहां वीडियो और घटनाक्रम को सामाजिक भेदभाव से जोड़कर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं प्रभारी प्राचार्य इसे सामान्य पूजा-अर्चना का हिस्सा बता रहे हैं।
ऐसे में वीडियो की तारीख, पूजा के उद्देश्य और लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





