बेबस्था पर गंभीर सवाल:-निर्माणाधीन सोहावल बाईपास पर विकास की राह में मौत के गड्ढे!

बारिश ने बढ़ाई मुश्किल, सड़क पर जलभराव से हादसे का खतरा; जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
भोपाल सतना जिले में निर्माणाधीन सोहावल बाईपास के आसपास सड़क की बदहाल स्थिति अब राहगीरों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने बड़े और गहरे गड्ढे बारिश के बाद पानी से लबालब हैं। पानी भर जाने के कारण गड्ढों की वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ अन्य वाहन चालकों के लिए भी यह मार्ग जोखिम भरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के बाद समस्या और गंभीर हो गई है। सड़क पर जमा पानी और कीचड़ के बीच वाहन चालकों को यह समझ पाना मुश्किल होता है कि आगे सड़क समतल है या अचानक कोई गहरा गड्ढा मौजूद है। दिन के समय तो किसी तरह सावधानी बरतकर वाहन निकाले जा सकते हैं,लेकिन रात के समय स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। पर्याप्त रोशनी चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग के अभाव में हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
⚠️ निर्माण चल रहा है तो सुरक्षा व्यवस्था कहां है?
निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं में यातायात को सुरक्षित बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होती है। निर्माण कार्य के कारण यदि मौजूदा मार्ग प्रभावित हो रहा है तो वैकल्पिक रास्ते, चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग,जल निकासी और अस्थायी मरम्मत जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हो जाती हैं। लेकिन सोहावल बाईपास के आसपास दिखाई दे रही स्थिति इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
सवाल यह भी है कि जब बारिश के मौसम में जलभराव और गड्ढों की समस्या पहले से सामने आ रही है तो उन्हें भरने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे? क्या संबंधित निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही सक्रिय होंगे?
विकास जरूरी, लेकिन सुरक्षा की कीमत पर नहीं
सड़क और बाईपास का निर्माण क्षेत्र के विकास तथा बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए जरूरी है। लेकिन विकास कार्य के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निर्माण कार्य के चलते यदि सड़क खराब हुई है तो अस्थायी रूप से गड्ढों में मुरम या गिट्टी भरने, जल निकासी की व्यवस्था करने और खतरनाक स्थानों पर स्पष्ट चेतावनी संकेत लगाने जैसे तत्काल उपाय किए जा सकते हैं।
स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि सड़क की स्थिति को लेकर कई बार परेशानी सामने आती रही है लेकिन जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भरने से जोखिम और बढ़ गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार स्तर पर ऐसी प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही, जिससे राहगीरों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।
❓ हादसे के बाद जागेगा सिस्टम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसी दुर्घटना का इंतजार क्यों करें? यदि इन गड्ढों के कारण कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है और किसी व्यक्ति की जान चली जाती है अथवा कोई गंभीर रूप से घायल होता है, तो जवाबदेही किसकी होगी?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सोहावल बाईपास के आसपास सड़क के गड्ढों को तत्काल भरा जाए, जलभराव की समस्या दूर की जाए, खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं तथा रात में वाहन चालकों को स्पष्ट रूप से रास्ते की स्थिति दिखाई देने के लिए पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
फिलहाल निर्माणाधीन सोहावल बाईपास की स्थिति विकास कार्यों की निगरानी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रही है। विकास की राह में बाधाएं आ सकती हैं, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। हादसा होने के बाद व्यवस्था सुधारने से बेहतर है कि हादसा होने से पहले जिम्मेदार जागें।
✍️ मुकेश पाण्डेय





