नरौरा में अवैध शराब कारोबार पर बड़ा सवाल: नरौरा में अवैध शराब नेटवर्क पर बड़े सवाल, किस अधिकारी की छत्रछाया में फल-फूल रहा कारोबार?

मैहर। जिले के नरौरा गांव में कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से अवैध रूप से शराब की बिक्री और भंडारण का कार्य संचालित हो रहा है लेकिन शिकायतों और विरोध के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन एक तरफ नशा मुक्ति अभियान चलाकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहा है वहीं दूसरी तरफ गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुलेआम शराब बिकने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
वायरल वीडियो में एक मकान परिसर के भीतर बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें और कार्टन दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी सत्यता की जांच होना अभी बाकी है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए तो कथित अवैध कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में लंबे समय से यह चर्चा है कि कथित रूप से एक प्रभावशाली नेटवर्क या तथाकथित भाटिया ग्रुप शराब की पैकारी और आपूर्ति से जुड़ा हुआ है। हालांकि इस संबंध में किसी भी सरकारी एजेंसी या प्रशासनिक अधिकारी द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जांच एजेंसियों को इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस पूरे मामले में अब एक और बड़ा सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि वास्तव में इतने लंबे समय से कथित अवैध कारोबार संचालित हो रहा है तो आखिर इसके पीछे किस वरिष्ठ अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण है? लोगों का कहना है कि बिना किसी मजबूत संरक्षण के लंबे समय तक इस प्रकार की गतिविधियां संचालित होना संभव नहीं माना जा सकता। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है और न ही किसी प्रकार का आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध है लेकिन ग्रामीण निष्पक्ष जांच के माध्यम से पूरे संरक्षण तंत्र का खुलासा किए जाने की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों के मन में यह आशंका भी जन्म ले रही है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार तंत्र की उदासीनता या किसी स्तर पर मिलीभगत के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए गए होते तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।






