112 की तत्काल सेवा रातभर बनी तमाशबीन! 64 साल के बुजुर्ग पर हमला, पुलिस बोली रोड तक लाओ तब आएंगे

रीवा। पुलिस की 112 सेवा को आम आदमी की आपातकालीन सुरक्षा का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है लेकिन मनगवां थाना अंतर्गत मनिकवार चौकी क्षेत्र के ग्राम देवतहा से सामने आया मामला इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि एक 64 वर्षीय वृद्ध को रात में घर में अकेला पाकर उसके साथ मारपीट की गई और कीमती सामान लूटने की कथित मंशा से उसे घंटों परेशान किया गया। वृद्ध मदद के लिए पुलिस से गुहार लगाता रहा लेकिन आरोप है कि पुलिस मौके पर पहुंचने के बजाय उसे ही आरोपी को सड़क तक लाने की बात कहती रही।
मामले में फरियादी रामलखन शर्मा पिता स्व. हनुमान प्रसाद द्विवेदी उम्र 64 वर्ष निवासी ग्राम देवतहा ने अपने बेटे के साथ थाने पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। दस्तावेज में दर्ज शिकायत के मुताबिक घटना 8 अगस्त 2026 की रात करीब 2 बजे की बताई गई है।
गाली-गलौज की आवाज सुनकर बाहर निकले वृद्ध, फिर शुरू हुआ कथित हमला
शिकायत के अनुसार रात में राकेश द्विवेदी कथित रूप से गाली-गलौज कर रहा था। आवाज सुनकर वृद्ध रामलखन शर्मा घर से बाहर निकले। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसके बाद विवाद बढ़ गया और राकेश ने वृद्ध के साथ मारपीट शुरू कर दी तथा दांत से काटकर घायल कर दिया। पीड़ित पक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि वृद्ध को घर में अकेला पाकर उसके साथ मारपीट करने के पीछे कीमती सामान हासिल करने या लूटने की कथित मंशा थी। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
नशे में आरोपी का कथित तांडव, सुबह तक संघर्ष करता रहा वृद्ध
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी शराब के नशे में था और रातभर वृद्ध के साथ मारपीट तथा विवाद करता रहा। 64 वर्षीय वृद्ध ने अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस की मदद मांगी, लेकिन आरोप है कि तत्काल पुलिस सहायता नहीं मिली। एक बुजुर्ग व्यक्ति वह भी रात के समय कथित हमलावर के सामने अकेला संघर्ष करता रहा—यह स्थिति अपने आप में पुलिस की आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उसे रोड तक लेकर आओ, तब आएंगे क्या यही है 112 की इमरजेंसी सेवा?
पीड़ित पक्ष के अनुसार 112 पर सूचना देने के बाद पुलिसकर्मियों की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि उसे रोड तक लेकर आइए तब हम आएंगे। यही कथित जवाब अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
यदि एक 64 वर्षीय व्यक्ति रात के अंधेरे में हमले का शिकार हो रहा हो घायल हो चुका हो और आरोपी उसके आसपास मौजूद हो, तो क्या पुलिस की आपातकालीन सेवा का काम पीड़ित को ही आरोपी को पकड़कर सड़क तक लाने के लिए कहना है? अगर उसी दौरान आरोपी दोबारा हमला कर देता? अगर वृद्ध की जान चली जाती? अगर गंभीर चोट के कारण उसकी हालत बिगड़ जाती? तब जिम्मेदारी किसकी होती?
रातभर पुलिस का इंतजार, सुबह सामने आया FIR का मामला
पीड़ित पक्ष का कहना है कि वृद्ध रातभर संघर्ष करता रहा और पुलिस की मदद का इंतजार करता रहा। सुबह आरोपी के रिश्तेदार और पत्नी उसे वहां से ले गए। इसके बाद थाने में FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया सामने आई।यहां एक और सवाल उठता है कि जब रात में पुलिस सहायता मांगी गई थी तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या मौके पर पुलिस पहुंची थी? यदि नहीं पहुंची तो 112 कॉल पर किस स्तर से क्या कार्रवाई की गई?
वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की जवाबदेही
घटना के बाद सामने आए वीडियो में वृद्ध अपनी आपबीती बताते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उनके शरीर पर चोट के निशान भी नजर आते हैं। वीडियो में कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि और चोटों की वास्तविक प्रकृति चिकित्सकीय जांच से स्पष्ट होगी, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कथित भूमिका को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं।
अब जांच का केंद्र सिर्फ FIR नहीं, 112 की पूरी कार्यप्रणाली
मामला केवल FIR दर्ज होने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अब जांच का विषय यह भी होना चाहिए कि 112 पर कॉल किस समय की गई, कॉल किसने रिसीव की पुलिस टीम को कितनी देर में सूचना मिली मौके पर जाने के लिए क्या निर्देश दिए गए और पुलिस मौके पर क्यों नहीं पहुंची। यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक बुजुर्ग की मदद में देरी का मामला नहीं होगा, बल्कि आपातकालीन पुलिस सेवा की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न होगा। एक तरफ पुलिस जनता को संकट की घड़ी में तत्काल सहायता का भरोसा देती है, वहीं दूसरी तरफ यदि एक वृद्ध को ही कथित हमलावर को लेकर सड़क तक आने के लिए कहा जाए तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि 112 की तत्काल सेवा आखिर किसके लिए है? अब निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हैं। क्या वे 112 कॉल रिकॉर्ड, पुलिस रिस्पॉन्स टाइम, घटनास्थल पर पुलिस की अनुपस्थिति लगाए गए आरोप और FIR में दर्ज धाराओं की निष्पक्ष जांच कराएंगे? यही जांच तय करेगी कि इस पूरे मामले में वास्तव में क्या हुआ और रातभर मदद की गुहार लगाने वाले 64 वर्षीय वृद्ध को समय पर पुलिस सहायता क्यों नहीं मिल सकी।





