जीतू पटवारी के खिलाफ कोर्ट का जमानती वारंट, मानहानि मामले में पुलिस से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ ग्वालियर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने मानहानि से जुड़े एक मामले में जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और अगली तारीख तक जीतू पटवारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
2024 के चुनावी बयान से जुड़ा है मामला
यह मामला बहुजन समाज पार्टी (BSP) के तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि चुनावी सभा के दौरान जीतू पटवारी ने सार्वजनिक रूप से उनके बारे में ऐसे बयान दिए, जिनसे उनकी मानहानि हुई। इसी आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
अदालत में पेश नहीं होने पर जारी हुआ वारंट
कोर्ट के अनुसार, जीतू पटवारी को 16 जनवरी 2026 को अदालत में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, निर्धारित तारीख पर उनके उपस्थित नहीं होने के बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से यह भी पूछा कि जब जीतू पटवारी सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने में कठिनाई क्यों हो रही है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा।
भिंड एसपी को दिए गए निर्देश
अदालत ने भिंड के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक जीतू पटवारी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, 4 मई 2024 को भिंड के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि चुनावी सभा में उन्होंने देवाशीष जरारिया को लेकर कथित तौर पर बीजेपी से जुड़े होने संबंधी टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता ने उस समय इस बयान का वीडियो भी पुलिस को सौंपने का दावा किया था। मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।





