धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी BJP, ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट के बाद बोले- समर्थकों से पूछकर तय करूंगा अगला कदम

उत्तर प्रदेश की सियासत में भाजपा को लेकर एक और नाराजगी सामने आई है। आंवला से पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है। राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद उनकी ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट ने सियासी हलचल बढ़ाई थी। अब उन्होंने पार्टी छोड़ने की वजह भी बताई है।
‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट के बाद भाजपा छोड़ने का ऐलान
भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर सिर्फ ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखा था। उनकी पोस्ट सामने आते ही इसे राज्यसभा टिकट नहीं मिलने से जोड़कर देखा गया और उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
हालांकि, अब कश्यप ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने भाजपा छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा फिलहाल नहीं किया है।
2024 के चुनाव में विरोध करने वालों को पद मिलने से नाराज
धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने की वजह बताते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान जिन लोगों ने उनकी खुलकर खिलाफत की थी, उन्हें बाद में पार्टी में बड़े पदों पर बैठाया गया।
कश्यप ने कहा कि अगर ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी कोई कार्रवाई नहीं करती और उन्हें अहम जिम्मेदारियां मिलती हैं, तो उनके जैसे व्यक्ति के लिए ‘टाटा-बाय-बाय’ कहना स्वाभाविक है। उन्होंने हालांकि किसी व्यक्ति का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया।
राज्यसभा टिकट से ज्यादा संगठन के रवैये पर सवाल
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। इस सूची में किसी मौजूदा राज्यसभा सांसद को दोबारा मौका नहीं दिया गया।
कश्यप का नाम संभावित दावेदारों की चर्चाओं में था, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें जगह नहीं मिली। हालांकि, भाजपा छोड़ने की वजह बताते हुए उन्होंने सीधे तौर पर राज्यसभा टिकट नहीं मिलने को कारण नहीं बताया, बल्कि 2024 के चुनाव के बाद पार्टी में हुए फैसलों पर अपनी नाराजगी जताई है।
‘समर्थकों की बैठक के बाद तय करूंगा अगला कदम’
धर्मेंद्र कश्यप ने कहा है कि वह जल्द ही अपने समर्थकों की बैठक बुलाएंगे। उनका कहना है कि समर्थकों की राय लेने के बाद ही वह तय करेंगे कि आगे किस राजनीतिक रास्ते पर जाना है।
उन्होंने संकेत दिया कि उनका राजनीतिक प्रभाव केवल लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है और मंडल तथा जिले में भी उनके समर्थक हैं। ऐसे में उनकी अगली रणनीति को लेकर बरेली मंडल की राजनीति में भी नजरें टिकी हैं।
सपा में जाने की अटकलें, लेकिन पुष्टि नहीं
भाजपा छोड़ने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर कुछ सपा समर्थकों ने उनका स्वागत करने वाले कमेंट किए हैं। उनकी अखिलेश यादव से मुलाकातों की चर्चाएं भी पहले सामने आती रही हैं।
हालांकि, अभी तक कश्यप ने सपा में शामिल होने की कोई घोषणा नहीं की है और न ही समाजवादी पार्टी की ओर से उनके शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि सामने आई है। इसलिए फिलहाल उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
बसपा से सपा और फिर भाजपा तक पहुंचा राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने 2002 में बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद वह सपा में शामिल हुए और विधायक तथा मंत्री भी रहे।
2014 में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थामा और आंवला लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। 2019 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सपा प्रत्याशी नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा।
अब भाजपा छोड़ने के बाद उनके राजनीतिक सफर का अगला पड़ाव क्या होगा, इसका फैसला समर्थकों की बैठक के बाद सामने आने की उम्मीद है।
धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़ने के ऐलान से बरेली की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट से शुरू हुआ घटनाक्रम अब औपचारिक पार्टी छोड़ने तक पहुंच गया है। हालांकि, कश्यप ने अभी किसी दूसरे दल में जाने का फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। उनकी प्रस्तावित समर्थक बैठक के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।





