स्कूल में शराब की बोतल लेकर पहुंचा शिक्षक, वीडियो वायरल हुआ तो निलंबन; 125 से घटकर 28 रह गए छात्र

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल से सामने आई घटना ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन वीडियो वायरल होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और शिक्षक को निलंबित कर दिया गया।
स्कूल परिसर में शराब की बोतल, वीडियो हुआ वायरल
मामला सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक के दिहुली नंबर-4 गांव स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय का है। यहां सहायक शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल पहुंचे थे। एक ग्रामीण ने उन्हें स्कूल परिसर में शराब की बोतल के साथ देखा और पूरी घटना का वीडियो बना लिया। गुरुवार को वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
जांच में भी नशे की हालत में मिले शिक्षक
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी तत्काल स्कूल पहुंचे। स्कूल स्टाफ के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर ने भी शिक्षक को कथित तौर पर नशे की हालत में पाया। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए गुरुवार रात सीधी कलेक्टर के आदेश से शिक्षक को निलंबित कर दिया।
शिकायतें पहले भी आती रही थीं
मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि कार्रवाई वीडियो वायरल होने के बाद ही क्यों हुई। छात्रों ने कई बार शिकायत की थी कि शिक्षक नशे में कक्षा में आते हैं और ठीक से खड़े तक नहीं हो पाते। अभिभावकों ने भी उनकी शराब पीने की आदत को लेकर सवाल उठाए थे। सहकर्मियों ने भी कथित तौर पर वर्षों तक उन्हें अपनी आदत सुधारने की सलाह दी, लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं आया।
एक शिक्षक पर बढ़ता गया पूरा बोझ
स्कूल में तैनात दूसरे शिक्षक अशोक शर्मा ने बताया कि वह एक दशक से अधिक समय से वहां पदस्थ हैं, जबकि दिनेश प्रसाद कोल की नियुक्ति 2008 में हुई थी। शर्मा के अनुसार, सहकर्मी के कथित लापरवाह रवैये के कारण उन्हें अतिरिक्त काम संभालना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि कभी इस स्कूल में करीब 125 छात्र पढ़ते थे, लेकिन अब नामांकन घटकर सिर्फ 28 रह गया है। उन्होंने कोल को शराब छोड़ने और अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए समझाने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
अभिभावकों से भी करते थे बहस
अशोक शर्मा के मुताबिक, शिक्षक के व्यवहार को लेकर अभिभावक भी नाराज थे। जब वे नशे की हालत में स्कूल आने पर सवाल करते तो कथित तौर पर उनके साथ बहस होती थी। शर्मा ने बताया कि उन्हें कई बार अभिभावकों से अनुरोध करना पड़ता था कि वे इन परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों को स्कूल भेजते रहें।
निष्कर्ष: बच्चों की पढ़ाई से बड़ा कोई समझौता नहीं
यह घटना सिर्फ एक शिक्षक के निलंबन तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाती है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित निगरानी और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी जिन शिक्षकों के कंधों पर है, उनसे अनुशासन और जिम्मेदारी की उम्मीद स्वाभाविक है। वीडियो वायरल होने का इंतजार किए बिना शिकायतों पर कार्रवाई हो, तभी शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रह सकेगा।





