रीवा में पुल कांड: नए निर्माण की लापरवाही से टूटा पुराना पुल, रास्ता बंद डायवर्जन से शहर में कई गुना बढ़ा ट्रैफिक, FIR न होने पर उठे सवाल

रीवा। जिले के रतहरा से चोरहटा मार्ग पर चल रहा पुल निर्माण कार्य अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। यहां स्थित पुराना पुल जो पहले से जर्जर था अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इस पुल के ठीक बगल में KCC कंपनी द्वारा नया पुल बनाया जा रहा है और इसी निर्माण कार्य में बरती गई कथित लापरवाही को पुराने पुल की इस हालत का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार नए पुल के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया गया। भारी मशीनों की आवाजाही गहरी खुदाई और तकनीकी सतर्कता की कमी के चलते पुराने पुल की नींव कमजोर होती चली गई। नतीजतन पुल की संरचना बुरी तरह प्रभावित हुई और उसे उपयोग के लायक नहीं माना गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पुराने पुल को पूरी तरह बंद कर दिया है और यातायात को दूसरे मार्गों पर डायवर्ट कर दिया गया है। लेकिन इस डायवर्जन का असर अब पूरे शहर में साफ नजर आ रहा है। जहां पहले सामान्य ट्रैफिक रहता था अब वहां कई गुना अधिक वाहनों का दबाव देखा जा रहा है। प्रमुख सड़कों पर लंबा जाम लग रहा है और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे हालात का सबसे ज्यादा असर पुलिस विभाग और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए पुलिस के अधिकारी से लेकर जवान तक लगातार सड़कों पर तैनात हैं लेकिन इसके बावजूद स्थिति नियंत्रण में नहीं आ पा रही है। घंटों जाम में फंसे लोग अब प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े घटनाक्रम के बावजूद अब तक KCC कंपनी के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। जबकि आरोप सीधे तौर पर कंपनी की लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है क्या जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है या फिर जांच में ही लापरवाही बरती जा रही है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस पुल और सड़क परियोजना में लापरवाही न केवल सरकारी धन की बर्बादी है बल्कि आम जनता की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी कंपनी व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही वैकल्पिक यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाकर शहर को जाम से राहत दिलाई जाए।





