रीवा में विकास बना मुसीबत! KCC कंपनी की मनमानी से बिना डायवर्जन बंद हुई सड़क प्रोजेक्ट मैनेजर के बयान से भड़का जनाक्रोश

रीवा। रीवा जिला में करोड़ों की लागत से बन रही रतहरा से चोरहटा फोरलेन सड़क अब जनता के लिए राहत नहीं बल्कि रोज़ की परेशानी का कारण बनती जा रही है। ताज़ा मामला इटौरा-विश्वविद्यालय मार्ग का है जहां निर्माण एजेंसी KCC कंपनी की कथित लापरवाही और मनमानी ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। आरोप है कि कंपनी ने बिना किसी वैकल्पिक डायवर्जन के मुख्य मार्ग को अचानक बंद कर दिया जिससे आमजन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सड़क न केवल शहर बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ उत्तर प्रदेश के लिए भी एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। रोज़ाना हजारो भारी वाहन के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन KCC कंपनी द्वारा सड़क पर मलबा डालकर और खुदाई कर मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है। हालात इतने खराब हैं कि सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, पानी भरा हुआ और किनारे निर्माण सामग्री के ढेर लगे हुए हैं जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंपनी ने न तो कोई पूर्व सूचना दी और न ही कोई वैकल्पिक मार्ग (डायवर्जन) तैयार किया। अचानक रास्ता बंद होने से लोग घंटों जाम में फंस रहे हैं और कई बार उन्हें लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चे नौकरीपेशा लोग और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जब स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर KCC कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से संपर्क किया तो उनका रवैया और भी हैरान करने वाला रहा। लोगों का आरोप है कि प्रोजेक्ट मैनेजर ने साफ शब्दों में कहा सड़क नहीं खोलेंगे जो करना है कर लो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझ पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। इस बयान ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है और अब मामला प्रशासन तक पहुंच चुका है।
ग्रामीणों और शहरवासियों ने संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराते हुए तत्काल सड़क खोलने और उचित डायवर्जन की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्य का मतलब जनता को परेशानी देना नहीं होना चाहिए। अगर प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब KCC कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगे हों। इससे पहले भी निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता, धूल प्रदूषण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस बार सख्त कदम उठाएगा या फिर जनता को इसी तरह परेशानियों के बीच जीना पड़ेगा? फिलहाल रीवा में विकास के नाम पर चल रहा यह निर्माण कार्य आम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है और लोगों की नजरें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।





