
रीवा । रीवा जिले में निर्माणाधीन 19 किलोमीटर लंबी रतहरा से चोरहटा फोरलेन सड़क अब विकास से ज्यादा खतरे का प्रतीक बनती जा रही है। इस मार्ग पर सैकड़ों की संख्या में ऐसे वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं जिनके पास न वैध परमिट है और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद परिवहन विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यह वाहन एक निजी निर्माण कंपनी (KCC) के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं जो नियमों को दरकिनार कर भारी वाहन सड़कों पर उतार रही है। खास बात यह सामने आई है कि UP22BT2181 सीरीज के कई वाहनों के जरूरी कागजात तक पूरे नहीं हैं। आरोप है कि कंपनी इन वाहनों के दस्तावेज बनवाना ही भूल गई लेकिन इसके बावजूद ये वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
10 महीनों से नहीं हुई दस्तावेज जांच
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले करीब 10 महीनों से परिवहन विभाग द्वारा इन वाहनों की किसी भी प्रकार की जांच नहीं की गई। न तो परमिट की पुष्टि हुई और न ही फिटनेस की जांच। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नियम केवल आम नागरिकों के लिए ही हैं?
हादसों का बढ़ता ग्राफ
रतहरा-चोरहटा मार्ग पर आए दिन छोटे-बड़े हादसे सामने आ रहे हैं। ओवरलोडिंग तेज रफ्तार और खराब हालत वाले वाहनों के कारण कई लोग घायल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा होना तय है।
परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप
लोगों का आरोप है कि परिवहन विभाग केवल कागजों का शेर बनकर रह गया है। आम लोगों के वाहनों पर तो सख्ती दिखाई जाती है लेकिन बड़े प्रोजेक्ट में लगे वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन भी बनी औपचारिकता
इस मामले में कई बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे इसे प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत मान रहे हैं।
क्या दबाव में है विभाग?
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में ठेकेदार कंपनी का प्रभाव और राजस्व से जुड़े पहलू विभाग की निष्क्रियता का कारण हो सकते हैं। यही वजह है कि बिना कागजात वाले वाहन भी खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
जनता की मांग तुरंत कार्रवाई हो
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि KCC कंपनी के सभी वाहनों की तत्काल जांच कराई जाए विशेष रूप से UP22BT2181 सीरीज के वाहनों के दस्तावेजों की जांच हो। साथ ही दोषी अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है।





