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क्या शराब कारोबार के सामने नतमस्तक है मैहर का सिस्टम? अवैध व्यापार पर उठे गंभीर सवाल

मैहर जिले में एक बार फिर अवैध शराब कारोबार को लेकर प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नेशनल हाईवे के किनारे खुलेआम फलते-फूलते इस काले धंधे ने न केवल कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पूरा सिस्टम इस अवैध कारोबार के सामने नतमस्तक हो चुका है।

ग्रामीण अंचलों से लगातार मिल रही शिकायतों के अनुसार अमदरा अमरपाटन और मैहर देहात थाना क्षेत्रों में अवैध शराब का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। हाईवे से सटे गांवों और ढाबों के आसपास यह कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है, जहां पुलिस और आबकारी विभाग की सक्रियता लगभग नगण्य नजर आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन ढलते ही इन इलाकों में शराब की अवैध बिक्री चरम पर पहुंच जाती है, जिससे सामाजिक माहौल भी बिगड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 1 अप्रैल 2026 से अब तक की गई कार्रवाइयों का दायरा आखिर कितना प्रभावी रहा है। क्या पुलिस और आबकारी विभाग केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि छोटी मछलियों पर कार्रवाई कर बड़ी मछलियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे अवैध कारोबार का असली नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।

गौरतलब है कि पूर्व में भी मैहर और अमरपाटन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जा चुका है। विरोध और शिकायतों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में कोई ठोस सुधार देखने को नहीं मिला है। इससे आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा है और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थिति यह है कि जब मामला अत्यधिक गंभीर हो जाता है तभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्तर से दबिश दी जाती है। हालांकि यह कार्रवाई कुछ समय के लिए असर जरूर दिखाती है लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में हालात जल्द ही पहले जैसे हो जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कार्रवाई में निरंतरता और रणनीतिक दृष्टिकोण की कमी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अब यह मांग तेज हो गई है कि पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान में अवैध शराब के खिलाफ सख्त और सुनियोजित अभियान चलाया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक इस धंधे के मूल स्रोत सप्लाई चेन और बड़े संचालकों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि अवैध शराब न केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरा है बल्कि यह युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा है और अपराध दर को भी बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में प्रशासन को केवल औपचारिक कार्रवाई से आगे बढ़कर ठोस और निर्णायक कदम उठाने होंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मैहर प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता देगा? क्या अवैध शराब के इस जाल को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी या फिर यह मामला केवल कागजी कार्रवाई और छिटपुट दबिश तक ही सीमित रह जाएगा।

फिलहाल जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस बार वास्तव में कोई बड़ा और स्थायी बदलाव देखने को मिलेगा या फिर अवैध शराब का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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