KCC कंपनी पर सड़क निर्माण में धांधली के आरोप, घटिया सामग्री से तैयार हो रहा करोड़ों का प्रोजेक्ट

6 एमएम गिट्टी और राखड़ से बनाया जा रहा बेस, कल्वर्ट निर्माण में भी गुणवत्ता से समझौते के आरोप
मीडिया ऑडीटर | रीवा जिले में निर्माणाधीन सड़क परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है जिससे करोड़ों रुपए की परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण एजेंसी केसीसी कंपनी द्वारा सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों के विपरीत 6 एमएम गिट्टी तथा अत्यधिक मात्रा में राखड़ का उपयोग कर बेस तैयार किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरोप है कि निर्माण एजेंसी कम लागत में कार्य पूरा कर अधिक मुनाफा कमाने की मंशा से मानकों को दरकिनार कर रही है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि हाल ही में निर्मित एक कलवर्ट में भी गुणवत्ता से समझौता किया गया। बताया जा रहा है कि कलवर्ट के दोनों ओर सरिया की मात्रा कम करने के उद्देश्य से कंक्रीट की दीवार खड़ी कर लीपापोती की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तो कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री पहली ही नजर में निम्न गुणवत्ता की दिखाई दे रही है। ऐसे में बरसात के मौसम में सड़क की मजबूती और टिकाऊपन को लेकर आशंका बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाली सड़क यदि कुछ ही वर्षों में खराब हो गई तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तथा निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री के नमूनों की प्रयोगशाला परीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो शासन को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ जनता को भी खराब सड़क का दंश झेलना पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि लगातार उठ रहे सवालों और शिकायतों के बाद संबंधित विभाग निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या फिर करोड़ों रुपए की यह परियोजना भी अनियमितताओं की भेंट चढ़ जाएगी।





