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दिन में बंद रात के अंधेरे में चालू खेल? कई पेट्रोल पंपों से डीजल लेकर 200 लीटर की सीमा पार कर रही KCC कंपनी पर सवाल

मीडिया ऑडीटर विशेष पड़ताल | रीवा जिले में रतहरा से चोरहटा तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य के बीच KCC कंपनी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां शासन ने पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता बनाए रखने और संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए प्रति वाहन 200 लीटर डीजल की सीमा निर्धारित की है, वहीं KCC कंपनी कथित रूप से कई पेट्रोल पंपों से डीजल लेकर प्रतिदिन हजारों लीटर ईंधन जुटा रही है।

क्षेत्र में चर्चा है कि दिन के उजाले में नियमों और सीमाओं की बात की जाती है लेकिन रात के अंधेरे में डीजल सप्लाई का अलग ही खेल चलता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कंपनी के टैंकर विभिन्न पेट्रोल पंपों से ईंधन लेकर अपने स्टॉक को भर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि एक वाहन को 200 लीटर तक ही डीजल दिए जाने का प्रावधान है तो फिर 3000 लीटर या उससे अधिक डीजल की व्यवस्था आखिर कैसे हो रही है?

हाल ही में सामने आई तस्वीरों में जियो पेट्रोल पंप पर KCC से जुड़े बताए जा रहे टैंकर को डीजल भरवाते हुए देखा गया। इससे पहले भी स्थानीय लोगों द्वारा आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कंपनी के वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराया जाता है जबकि आम जनता को लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शासन का आदेश सभी के लिए समान है तो फिर KCC कंपनी को कथित तौर पर इतनी बड़ी मात्रा में डीजल किस आधार पर उपलब्ध कराया जा रहा है? क्या कंपनी को कोई विशेष अनुमति प्राप्त है? यदि हां तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? और यदि नहीं, तो फिर नियमों की निगरानी करने वाले विभाग क्या कर रहे हैं?

क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि कंपनी एक ही पंप पर निर्भर न रहकर कई पेट्रोल पंपों से ईंधन लेकर निर्धारित सीमा को व्यवहारिक रूप से पार कर रही है। यही वजह है कि अब लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर KCC कंपनी किसके संरक्षण में काम कर रही है कि बार-बार शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद जांच की दिशा में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं देता।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए ईंधन की आवश्यकता स्वाभाविक है, लेकिन यदि इसके लिए शासन के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है तो यह गंभीर विषय है। लोगों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग, परिवहन विभाग और पेट्रोलियम कंपनियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

अब जनता जानना चाहती है कि

क्या 200 लीटर की सीमा केवल आम नागरिकों के लिए है?  क्या KCC कंपनी को विशेष छूट दी गई है?
क्या विभिन्न पेट्रोल पंपों से डीजल लेकर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है? और सबसे बड़ा सवाल आखिर KCC कंपनी को संरक्षण किसका प्राप्त है?

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