अतीक हत्याकांड में तीन आरोपी सूरत से गिरफ्तार, फिर शिवम पर कार्रवाई क्यों नहीं?

छह माह बाद भी पनवार पुलिस ने पेश नहीं किया चालान? ADSP संदीप मिश्रा के पास पहुंची जांच तो क्या सामने आएगा पूरा सच, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में परिवार!
रीवा। अतीक अहमद शेख हत्याकांड में सूरत SOG द्वारा तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब रीवा पुलिस की जांच पर एक के बाद एक सवाल खड़े हो रहे हैं। सूरत पुलिस ने आकाश सिंह उर्फ सौरभ सिंह राजपूत, सत्यम सिंह राजपूत और अजीत सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया है। बताया गया कि आरोपी रीवा से फरार होकर सूरत पहुंचे थे और वहां निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहे थे। सूरत पुलिस को सूचना मिलने के बाद निगरानी कर तीनों को पकड़ा गया।
तीन आरोपियों की गिरफ्तारी ने जहां पुलिस कार्रवाई को नई दिशा दी है, वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अतीक हत्याकांड से जुड़े बाकी आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?पीड़ित पक्ष की ओर से चंपागढ़ निवासी पांच लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई थी। इनमें शिवम सिंह ठाकुर, अजीत सिंह ठाकुर, सौरभ सिंह ठाकुर, सत्यम सिंह ठाकुर और शक्ति सिंह ठाकुर के नाम बताए गए हैं। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब निगाहें शिवम सिंह और अन्य आरोपियों पर टिक गई हैं।
इसी बीच चर्चा है कि मामले की जांच ADSP रीवा संदीप मिश्रा को मिली है। यदि जांच वास्तव में उनके स्तर पर पहुंची है तो अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ADSP संदीप मिश्रा जांच की परतें खोल पाएंगे और शिवम सिंह की भूमिका पर पुलिस का रुख स्पष्ट कर पाएंगे? क्या जांच में नामजदगी, उपलब्ध साक्ष्य और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का नए सिरे से परीक्षण होगा?
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि शिवम सिंह को कार्रवाई से बचाने के लिए प्रभावशाली लोगों के स्तर पर संपर्क और दबाव की कोशिश की जा रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल पनवार पुलिस के चालान को लेकर है। घटना को करीब छह माह बीतने के बाद भी यदि चालान पेश नहीं हुआ है तो आखिर इसकी वजह क्या है? क्या विवेचना अभी अधूरी है क्या फरार आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार है या फिर जांच में कोई ऐसी कड़ी है जिसे पुलिस अभी सार्वजनिक नहीं करना चाहती?
बताया जा रहा है कि अतीक का परिवार अब मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। यदि परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है तो पुलिस की विवेचना, गिरफ्तारी,चालान और आरोपियों की भूमिका से जुड़े सवाल न्यायिक जांच के दायरे में भी आ सकते हैं।
अब सवाल सीधा है तीन आरोपी दूसरे राज्य में छिपे मिले और सूरत SOG ने उन्हें पकड़ लिया फिर रीवा में बाकी आरोपियों तक पुलिस कब पहुंचेगी? छह माह बाद भी चालान क्यों लंबित है? क्या ADSP संदीप मिश्रा की जांच से शिवम सिंह की भूमिका स्पष्ट होगी? और क्या पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ समान कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी?
अतीक के परिवार को न्याय और पुलिस जांच की पारदर्शिता दोनों की दरकार है। अब रीवा पुलिस की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि यह मामला निष्पक्ष जांच की दिशा में आगे बढ़ता है या सवालों के घेरे में ही उलझा रहता है।





