Airplane Mode में भी ट्रैक हो सकता है फोन? जानिए GPS का पूरा सच

फोन चोरी होने के बाद चोर अक्सर सबसे पहले डिवाइस को एयरप्लेन मोड पर डाल देते हैं ताकि कॉल, मैसेज और इंटरनेट कनेक्शन पूरी तरह बंद हो जाए। ऐसे में ज्यादातर लोगों को लगता है कि एयरप्लेन मोड ऑन होने के बाद फोन को ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। हालांकि तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सही नहीं है।
एयरप्लेन मोड क्या करता है?
एयरप्लेन मोड ऑन करते ही मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई और ब्लूटूथ जैसे सभी वायरलेस कनेक्शन बंद हो जाते हैं। इसका मतलब है कि फोन न तो कॉल रिसीव कर सकता है और न ही इंटरनेट का उपयोग कर सकता है। लेकिन इससे फोन के अंदर मौजूद GPS सिस्टम पूरी तरह बंद नहीं होता।
GPS सीधे पृथ्वी की कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स से सिग्नल प्राप्त करता है। इसलिए इसे काम करने के लिए मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती। यही वजह है कि एयरप्लेन मोड में भी फोन अपनी लोकेशन निर्धारित कर सकता है।
फिर ट्रैकिंग कैसे होती है?
हालांकि GPS लोकेशन प्राप्त कर सकता है, लेकिन समस्या यह है कि एयरप्लेन मोड में फोन उस लोकेशन को इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के जरिए किसी सर्वर तक नहीं भेज सकता। यानी फोन को अपनी लोकेशन पता होती है, लेकिन वह उसे शेयर नहीं कर पाता।
यदि एयरप्लेन मोड के दौरान वाई-फाई या ब्लूटूथ को मैन्युअली ऑन कर दिया जाए, तो फोन दोबारा नेटवर्क से जुड़ सकता है और लोकेशन डेटा संबंधित सेवाओं तक पहुंच सकता है।
चोरी हुए फोन को खोजने में क्या मदद मिलती है?
Android और iPhone में उपलब्ध “Find My Device” और “Find My iPhone” जैसी सेवाएं फोन के आखिरी ज्ञात स्थान (Last Known Location) को सेव करके रखती हैं। यदि डिवाइस दोबारा किसी नेटवर्क से कनेक्ट होता है, तो उसकी नई लोकेशन अपडेट हो सकती है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियां विशेष परिस्थितियों में उन्नत तकनीकों और जांच उपकरणों की मदद से भी डिवाइस की लोकेशन से संबंधित जानकारी जुटा सकती हैं।





