छिंदवाड़ा में गर्भवती को खटिया पर नदी पार कराना पड़ा, रास्ते में हुई डिलीवरी

छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विकासखंड के लोहड़ी मोहल्ला (ग्राम हथोड़ा) में रहने वाले करीब 20 परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को एक नदी पार करनी पड़ती है। वर्षों से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। बारिश के मौसम में यह रास्ता जानलेवा बन जाता है।
एम्बुलेंस नहीं पहुंची, ग्रामीण बने सहारा
बुधवार को एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। आशा कार्यकर्ता ने तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन खराब नेटवर्क और संपर्क मार्ग की समस्या के कारण एम्बुलेंस समय पर गांव तक नहीं पहुंच सकी। महिला की हालत बिगड़ती देख गांव के युवाओं ने बिना समय गंवाए उसे खटिया पर लिटाया और उफनती नदी पार कराने का फैसला किया।
रास्ते में ही हुआ प्रसव
ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर तेज बहाव के बीच महिला को खटिया सहित नदी पार कराया। इसी दौरान रास्ते में महिला की डिलीवरी हो गई। इसके बाद नवजात और मां को बाइक के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों का इलाज शुरू किया।
जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित
अमरवाड़ा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. के. ठाकुर के अनुसार, प्रसूता को अस्पताल लाने के बाद आवश्यक उपचार दिया गया। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। हालांकि गांव के नाम को लेकर कुछ प्रशासनिक विसंगतियां सामने आई हैं, लेकिन घटना की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है।
ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल और सड़क का निर्माण कर दिया जाता तो ऐसी जान जोखिम में डालने वाली स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने प्रशासन पर वर्षों से मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है और जल्द से जल्द पुल निर्माण तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
विकास के दावों पर खड़े हुए सवाल
यह घटना एक बार फिर बताती है कि ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। विकास के दावों के बीच ऐसी घटनाएं प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस घटना के बाद संबंधित विभाग जल्द ठोस कदम उठाएंगे ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।





