
रीवा। चर्चित गांजा तस्करी प्रकरण के मुख्य आरोपियों में शामिल आदित्य मिश्रा की गिरफ्तारी ओडिशा पुलिस द्वारा किए जाने के बाद रीवा पुलिस और रीवा रेंज की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। यह मामला अब केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इससे पुलिस की जांच तकनीकी निगरानी और समन्वय व्यवस्था पर भी बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार आदित्य मिश्रा लंबे समय से पुलिस की तलाश में था। इस बीच रोहित शर्मा के सड़क दुर्घटना में मौत होने के बाद मामले से जुड़े कई तथ्य और चर्चाएं सामने आईं। इसके बावजूद आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर रहा। अंततः ओडिशा पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया कि जब मध्य प्रदेश पुलिस के पास साइबर सेल, तकनीकी सर्विलांस, मुखबिर तंत्र और विभिन्न विशेष इकाइयां उपलब्ध हैं तब भी आरोपी आखिर इतनी लंबी अवधि तक गिरफ्त से बाहर कैसे रहा।
रीवा शहर में पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी पदस्थ हैं और अपराध नियंत्रण के लिए अलग-अलग शाखाएं कार्यरत हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि आरोपी का नेटवर्क सक्रिय था और वह कथित रूप से रीवा तथा आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा हुआ था तो स्थानीय स्तर पर उसकी लोकेशन और गतिविधियों का पता क्यों नहीं लगाया जा सका। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
मामले को लेकर यह चर्चा भी रही कि गोविंदगढ़ और मनगवां पुलिस समय रहते आरोपियों तक क्यों नहीं पहुंच सकी। कुछ स्तरों पर यह आरोप भी लगाए गए कि कार्रवाई को लेकर दबाव बनाया गया था। हालांकि इन आरोपों की किसी सक्षम एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे आरोपों में तथ्य हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
उधर पुलिस विभाग इन दिनों आपकी पुलिस आपके द्वार अभियान चला रहा है। लेकिन नागरिकों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि यदि वांछित आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहे और अंततः दूसरे राज्य की पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे तो ऐसे जनसंपर्क अभियानों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना अपराध नियंत्रण और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी होना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि रीवा शहर के कुछ इलाकों में लंबे समय से नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो यह जांच का विषय है कि संबंधित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस विभाग की ओर से इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
कानून के जानकारों का कहना है कि आदित्य मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम की विभागीय समीक्षा होनी चाहिए। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जांच के दौरान कौन-कौन से तकनीकी और कानूनी प्रयास किए गए आरोपी कब से फरार था किन एजेंसियों के बीच समन्वय हुआ और अंततः ओडिशा पुलिस तक पहुंचने की स्थिति कैसे बनी। इससे जनता के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस पूरे मामले में उच्च स्तर पर समीक्षा होगी क्या कथित लापरवाही या समन्वय की कमी की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी और क्या रीवा पुलिस भविष्य में ऐसे मामलों में तकनीकी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग कर अपराधियों पर समय रहते शिकंजा कस पाएगी।





