मैहर की खौफनाक हकीकत! मौत के साये में स्कूल जाते मासूम, सड़क नहीं तो हर दिन दांव पर जिंदगी

मीडिया ऑडीटर मैहर| मैहर जिले से एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की बदहाल व्यवस्था को उजागर करने वाला एक चिंताजनक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को ग्राम सोनवारी का बताया जा रहा है, जिसमें स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चे स्कूल आने-जाने के दौरान ऐसे मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं जहां मामूली सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इस दृश्य ने न केवल ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है बल्कि प्रशासनिक दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सुरक्षित सड़क निर्माण और आवागमन की व्यवस्था को लेकर कई बार संबंधित विभागों एवं प्रशासन को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक समस्या पहुंचाई गई लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि हर सुबह और शाम दर्जनों स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने और वापस घर लौटने के लिए मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। पानी भरने या तेज बहाव की स्थिति में यह रास्ता बच्चों के लिए किसी खतरे से कम नहीं रहता। अभिभावकों का कहना है कि रोज बच्चों को स्कूल भेजते समय मन में अनहोनी की आशंका बनी रहती है लेकिन शिक्षा भी जरूरी है और दूसरा सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण मजबूरी में उन्हें इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है।
यह पहला मामला नहीं है जिसने प्रशासनिक लापरवाही की ओर ध्यान आकर्षित किया हो। इससे पहले ग्राम भदनपुर से भी ऐसा ही दर्दनाक मामला सामने आया था, जहां स्कूल से लौटते समय एक पांच वर्षीय मासूम बच्चा तेज बहाव में बह गया था। सौभाग्य से ग्रामीणों की सतर्कता और त्वरित प्रयासों के कारण बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया लेकिन उस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। इसके बावजूद यदि आज भी बच्चों को ऐसे ही खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ रहा है तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है जिसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? लोगों का आरोप है कि विकास के दावे कागजों तक सीमित हैं जबकि जमीनी हकीकत में गांवों के बच्चे आज भी अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर लोगों में आक्रोश भी देखा जा रहा है। कई लोगों ने प्रशासन से तत्काल निरीक्षण कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।





