
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के इटौरा बायपास स्थित जानकी फिलिंग जियो-बीपी पेट्रोल पंप एक बार फिर चर्चाओं में है। देर रात सामने आए एक वीडियो के बाद स्थानीय किसानों और नागरिकों ने ईंधन वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। वीडियो में रात लगभग 1:11 बजे पेट्रोल पंप पर दो बड़े टैंकर ईंधन भरवाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन इसके सामने आने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि कृषि कार्य के लिए उन्हें आवश्यकता के अनुरूप डीजल उपलब्ध नहीं हो पाता। कई किसानों का कहना है कि कभी स्टॉक की कमी तो कभी अन्य कारण बताकर उन्हें सीमित मात्रा में डीजल दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर उनका दावा है कि व्यावसायिक उपयोग के लिए बड़े वाहनों को लगातार ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मीडिया कर्मियों द्वारा देर रात मौके पर पहुंचने पर कथित रूप से दो टैंकर ईंधन डिस्पेंसर के पास खड़े दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि टैंकरों में काफी देर तक ईंधन भरा गया। वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि रतहरा से चोरहटा मार्ग का निर्माण कर रही केसीसी कंपनी के वाहनों के लिए सार्वजनिक पेट्रोल पंप से नियमित रूप से बड़ी मात्रा में डीजल दे रहे हैं । हालांकि कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अब हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी निर्माण कंपनी को सार्वजनिक पेट्रोल पंप से बड़े पैमाने पर ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है तो संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह प्रक्रिया लागू नियमों और अनुमति के अनुरूप है या नहीं। साथ ही ईंधन बिक्री का रिकॉर्ड स्टॉक रजिस्टर और आवश्यक अनुमतियों की जांच भी की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं और कृषि उपयोगकर्ताओं को पर्याप्त डीजल नहीं मिल रहा जबकि व्यावसायिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि केवल सक्षम अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा संबंधित पेट्रोलियम कंपनी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कोई अनियमितता नहीं हुई है, तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
समाचार लिखे जाने तक जांकी फिलिंग जियो-बीपी पेट्रोल पंप प्रबंधन तथा संबंधित निर्माण कंपनी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल वीडियो, स्थानीय आरोपों और किसानों की शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।




