
रीवा। रीवा से 50 हजार रुपये के इनामी कथित गांजा तस्कर आदित्य मिश्रा को उड़ीसा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पूरे रीवा रेंज की पुलिस अचानक सक्रिय नजर आ रही है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में दबिश, चेकिंग और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि इस घटनाक्रम ने पुलिस की पूर्व कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार आदित्य मिश्रा के विरुद्ध रीवा और मऊगंज जिले के विभिन्न थानों में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए जाते हैं। इसके बावजूद वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचा रहा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ऑपरेशन प्रहार 2.0 और लगातार कॉम्बिंग अभियान चलाए जा रहे थे तब स्थानीय पुलिस उसे पकड़ने में सफल क्यों नहीं हुई जबकि दूसरे राज्य की पुलिस रीवा पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर ले गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अतीत में कुछ मामलों में प्रभावशाली स्तर से सिफारिश या कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिशें हुई थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच अब यह मांग तेज हो गई है कि मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर वह कौन-सी परिस्थितियां थीं जिनके कारण गंभीर मामलों में वांछित आरोपी लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचा रहा।
मांग यह भी उठ रही है कि यदि पुलिस सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं में लगाए जा रहे आरोपों में कोई तथ्य है तो तत्कालीन मनगवां थाना प्रभारी सहित संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जाए कि क्या किसी अधिकारी द्वारा आदित्य मिश्रा के संबंध में कोई फोन सिफारिश या कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। यदि जांच में ऐसे किसी हस्तक्षेप के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो यह तथ्य भी सार्वजनिक किया जाए ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
उड़ीसा पुलिस की कार्रवाई के बाद अब लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या रीवा रेंज में शुरू हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई केवल एक गिरफ्तारी के बाद की प्रतिक्रिया है या पूरे नेटवर्क और पूर्व में हुई संभावित चूकों की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी।
जनता का मानना है कि कानून-व्यवस्था में विश्वास तभी मजबूत होगा जब पूरे मामले की पारदर्शी जांच हो तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या DGP स्तर से इस पूरे प्रकरण की व्यापक समीक्षा कराई जाएगी और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।





