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ऑपरेशन प्रहार 2.0 की खुली पोल! रीवा पुलिस तलाशती रह गई, उड़ीसा पुलिस ने रीवा से दबोचा 50 हजार का इनामी कथित गांजा तस्कर, अब उठ रहे संरक्षण और कार्रवाई पर सवाल

रीवा। विंध्य संभाग में अपराध और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार 2.0 के बीच एक ऐसी कार्रवाई सामने आई है जिसने रीवा रेंज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कथित गांजा तस्कर आदित्य मिश्रा की तलाश लंबे समय से पुलिस द्वारा किए जाने की बात कही जा रही थी उसे उड़ीसा पुलिस ने रीवा शहर के गड्डी मार्ग स्थित रिंग रोड के पास एक मकान पर तड़के करीब 5 बजे दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान एक स्कॉर्पियो वाहन भी जब्त किया गया। बाद में आरोपी को बिछिया थाना लाकर गिरफ्तारी की औपचारिक सूचना दी गई और न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद उड़ीसा पुलिस उसे अपने साथ ले गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आदित्य मिश्रा के विरुद्ध रीवा और मऊगंज जिले के विभिन्न थानों में मादक पदार्थों से जुड़े कई प्रकरण दर्ज बताए जाते हैं। अलग-अलग मामलों में उस पर कुल 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस आरोपी के विरुद्ध इतने गंभीर मामले दर्ज थे वह लंबे समय तक रीवा में कथित रूप से सक्रिय कैसे रहा और स्थानीय पुलिस उसे पकड़ने में सफल क्यों नहीं हो सकी।

उड़ीसा पुलिस की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों का दावा है कि आदित्य मिश्रा लंबे समय से रीवा संभाग में रहकर कथित रूप से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब विपक्ष ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी यह सवाल उठा रहे हैं कि जब ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत लगातार अपराधियों की धरपकड़ के दावे किए जा रहे थे तब इतना बड़ा वांछित आरोपी स्थानीय पुलिस की नजरों से कैसे बचा रहा।

इसी बीच पुलिस सूत्रों में यह चर्चा भी तेज है कि अतीत में कुछ मामलों में प्रभावशाली स्तर से कथित सिफारिश और दबाव की बातें सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार गोविंदगढ़ क्षेत्र के फरार आरोपी रोहित शर्मा के मामले में भी एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कथित सिफारिश किए जाने की चर्चा रही थी। बाद में रोहित शर्मा की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसी प्रकार मंगावां थाना क्षेत्र में आदित्य मिश्रा से जुड़े एक प्रकरण में भी कार्रवाई को लेकर कथित दबाव की चर्चाएं होती रहीं। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बिछिया थाना प्रभारी मनीषा उपाध्याय ने पुष्टि की कि उड़ीसा पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचना देकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और ट्रांजिट रिमांड के बाद आरोपी को अपने साथ ले गई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि दूसरे राज्य की पुलिस रीवा आकर एक इनामी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है, तो स्थानीय पुलिस की लगातार चल रही कार्रवाई और विशेष अभियान आखिर कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं। मामले ने ऑपरेशन प्रहार 2.0 की सफलता पर भी बहस छेड़ दी है।

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