राष्ट्रीय

प्रवेश वर्मा के थप्पड़ विवाद में नया खुलासा, साहिब सिंह पर पहले से दर्ज है MCD कर्मचारी से मारपीट का केस

दिल्ली में सड़क की गुणवत्ता को लेकर हुए विवाद के दौरान मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा द्वारा साहिब सिंह को थप्पड़ मारे जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा में है। अब साहिब सिंह से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले की जानकारी सामने आई है। तिलक नगर थाने में उनके खिलाफ MCD के एक कर्मचारी से कथित मारपीट का मामला दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में साहिब सिंह को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

2 जून को MCD कर्मचारी से मारपीट का आरोप

तिलक नगर थाने में दर्ज FIR नंबर 215/2026 के अनुसार, शिकायतकर्ता धन बहादुर MCD में अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम करते हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि 2 जून 2026 को उनकी ड्यूटी वार्ड नंबर 103 में कूड़ा उठाने वाली गाड़ी पर हेल्पर के रूप में लगी थी।

शिकायत के मुताबिक, सुबह करीब 11 बजे कूड़ा उठाने वाली गाड़ी कृष्णापुरी इलाके में पहुंची थी। इसी दौरान एक लड़की दूसरी मंजिल से नीचे खड़ी गाड़ी में कूड़ा डाल रही थी। वहां से एक मोटरसाइकिल गुजर रही थी और शिकायतकर्ता ने लड़की से कुछ देर रुकने को कहा।

आरोप है कि इसके बाद उसी घर से एक युवक कुछ अन्य लोगों के साथ बाहर आया और कूड़ा उठाने वाली गाड़ी को रोक लिया।

गाड़ी से उतारकर मारपीट का आरोप

शिकायतकर्ता धन बहादुर के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें गाड़ी से नीचे उतारा और मारपीट की। उनका आरोप है कि उन्हें दो-तीन गलियों तक ले जाया गया, जहां वह बेहोश हो गए।

होश आने के बाद उन्होंने खुद को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में पाया। शुरुआती बयान में उन्होंने आरोपियों में से एक का नाम करन बताया और कहा कि बाकी लोगों को सामने आने पर पहचान सकते हैं।

मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता का मेडिकल परीक्षण कराया। रिपोर्ट में चोट का कारण शारीरिक हमला दर्ज किया गया था। बाद में उन्हें RML अस्पताल रेफर किया गया।

CCTV जांच में साहिब सिंह का नाम सामने आया

पुलिस जांच के दौरान CCTV फुटेज भी हासिल की गई। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने फुटेज में साहिब सिंह की कथित मौजूदगी और मारपीट में उनकी भूमिका देखी, जिसके बाद जांच में उनका नाम सामने आया। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।

पुलिस ने FIR नंबर 215/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था। मामले की जांच तिलक नगर थाने की पुलिस को सौंपी गई।

प्रवेश वर्मा ने रविवार को साहिब सिंह को मारा था थप्पड़

यह पुराना मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि रविवार को पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान प्रवेश वर्मा और AAP विधायक जरनैल सिंह के बीच सड़क की गुणवत्ता को लेकर बहस हुई थी।

साहिब सिंह इस बातचीत को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड कर रहे थे। सामने आए वीडियो में प्रवेश वर्मा उनके मोबाइल को नीचे करते और फिर साहिब सिंह को थप्पड़ मारते दिखाई देते हैं। घटना के बाद साहिब सिंह ने दावा किया कि वह जरनैल सिंह के सोशल मीडिया पेज के लिए लाइव वीडियो कर रहे थे और उन्होंने मंत्री के साथ कोई अभद्रता नहीं की थी। उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दी है।

मंत्री ने भी दी अपनी सफाई

प्रवेश वर्मा ने घटना को लेकर अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि AAP विधायक के एक कार्यकर्ता ने उनके परिवार को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी और इसी वजह से उन्होंने गुस्से में प्रतिक्रिया दी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था।

वहीं साहिब सिंह ने आरोप लगाया है कि थप्पड़ मारने के साथ मंत्री के सुरक्षा कर्मियों ने भी उन्हें धक्का दिया और धमकी दी। पुलिस के सामने दोनों पक्षों की शिकायतें आने की बात सामने आई है और मामले की जांच जारी है।

पुराने केस से क्या बदला?

साहिब सिंह के खिलाफ दर्ज पुराना मामला मौजूदा थप्पड़ विवाद से अलग है। पुराने मामले में MCD कर्मचारी ने मारपीट का आरोप लगाया था और पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस केस में साहिब सिंह गिरफ्तार हुए और फिलहाल जमानत पर हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होना या गिरफ्तारी होना अपने आप में अपराध साबित होने के बराबर नहीं है। पुराने मामले में लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

प्रवेश वर्मा और साहिब सिंह के बीच रविवार को हुआ विवाद अब पुराने आपराधिक मामले की वजह से भी चर्चा में है। एक ओर साहिब सिंह ने मौजूदा घटना को लेकर पुलिस शिकायत दी है, वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ MCD कर्मचारी से कथित मारपीट का पुराना केस सामने आया है। दोनों मामलों में पुलिस और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, इसलिए आरोपों और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

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