उत्तराखंड MBBS दाखिलों में फर्जी प्रमाणपत्र का मामला, SIT जांच तेज; 350 अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के घेरे में

उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिलों से जुड़े कथित फर्जी प्रमाणपत्र मामले ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के प्रमाणपत्रों पर सवाल उठने के बाद FIR दर्ज हुई, दाखिले रद्द किए गए और अब अन्य आरक्षित श्रेणियों के दस्तावेजों की भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
पांच प्रमाणपत्रों पर उठे सवाल, चार दाखिले रद्द
मामला NEET-UG काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत जमा किए गए प्रमाणपत्रों से सामने आया। अधिकारियों के मुताबिक पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए और संबंधित जिला प्रशासन से सत्यापन कराया गया। जांच में इन प्रमाणपत्रों को फर्जी घोषित किए जाने के बाद चार छात्रों के MBBS दाखिले रद्द किए गए।
देहरादून में इस मामले को लेकर क्लेमेंट टाउन और रायपुर थाने में FIR भी दर्ज की गई है। पुलिस ने संबंधित छात्रों और परिवार के सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई शुरू की है।
SIT के सामने अब कई सवाल
मामले की जांच कर रही पुलिस और प्रशासन संबंधित दस्तावेज जुटा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए किसी संगठित गिरोह की भूमिका को लेकर अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
मेडिकल शिक्षा विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि NEET काउंसलिंग से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संबंधित जारीकर्ता अधिकारियों को सत्यापन के लिए भेजे जाएंगे। इसमें अधिवास समेत अन्य श्रेणी के दस्तावेज भी शामिल हैं।
350 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की मांग
इस मामले को सामने लाने वाले पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने करीब 350 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के अलावा कुछ अधिवास प्रमाणपत्रों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि, 350 अभ्यर्थियों के सभी प्रमाणपत्र संदिग्ध या फर्जी हैं, ऐसा प्रशासन ने नहीं कहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह संख्या जांच की मांग के दायरे को बताती है, न कि फर्जी प्रमाणपत्रों की पुष्टि की संख्या।
अधिवास प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में
बहुगुणा ने राज्य कोटे की MBBS सीटों में अधिवास की पात्रता को महत्वपूर्ण बताते हुए संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की मांग की है। उन्होंने कुछ अभ्यर्थियों की पात्रता और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए हैं।
वहीं, केवल उत्तराखंड के बाहर पढ़ाई करने या किसी दूसरे राज्य में NEET देने से किसी अभ्यर्थी का अधिवास प्रमाणपत्र फर्जी साबित नहीं होता। इसलिए इन दावों की वास्तविक स्थिति दस्तावेजों के आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाया
मामला सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून जिलाधिकारी को जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच का दायरा अन्य आरक्षित श्रेणियों तक बढ़ाने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार सभी आरक्षित श्रेणियों में जमा प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी और फर्जी पाए जाने पर उन्हें निरस्त कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
चार CSC केंद्रों पर भी कार्रवाई
मामले की जांच के बीच देहरादून प्रशासन ने 17 सितंबर को कई कॉमन सर्विस सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। रिपोर्टों के मुताबिक अनियमितताएं मिलने के बाद चार CSC केंद्रों को सील किया गया और कुछ कंप्यूटर तथा लैपटॉप जब्त किए गए।
अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि संदिग्ध प्रमाणपत्र कैसे जारी हुए, उनकी जांच के दौरान कौन-कौन से स्तर पर सत्यापन हुआ और क्या किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।
उत्तराखंड के MBBS दाखिलों से जुड़ा यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रमाणपत्रों की सत्यता सीधे आरक्षण और राज्य कोटे की पात्रता से जुड़ी है। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम जिम्मेदारी तय करने से पहले प्रशासनिक तथा पुलिस जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।





