उज्जैन शाही मस्जिद विवाद में पथराव, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले, 15 लोग हिरासत में

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाए जाने के दौरान सोमवार को तनाव बढ़ गया। पुलिस के मुताबिक, मौके पर पथराव के बाद आंसू गैस और हल्के बल का इस्तेमाल कर भीड़ को हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाला हिस्सा मस्जिद कमेटी की सहमति से हटाया जा रहा था। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल कुछ भ्रामक वीडियो और पोस्ट भी जांच के दायरे में आ गए हैं।
सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा हिस्सा
उज्जैन के छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाला हिस्सा हटाया जा रहा है। यह काम कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग को चौड़ा करने की योजना का हिस्सा है, जिसे 2028 के सिंहस्थ की तैयारियों से भी जोड़ा गया है। प्रशासन के अनुसार प्रभावित हिस्सा समुदाय के सदस्यों की सहमति से हटाया जा रहा है।
अफवाहों के बाद बिगड़ा माहौल
सोमवार को सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रसारित होने लगे, जिनमें पूरी शाही मस्जिद को गिराए जाने का दावा किया गया। पुलिस और अधिकारियों के मुताबिक, कुछ वीडियो AI से बनाए गए थे और उनमें मस्जिद को पूरी तरह ध्वस्त दिखाया गया था। इन पोस्ट के प्रसार के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके की ओर पहुंचने लगे।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए केवल प्रभावित हिस्सा हटाया जा रहा था, पूरी मस्जिद नहीं।
पुलिस पर पथराव, आंसू गैस का इस्तेमाल
मौके पर पहुंची भीड़ और पुलिस के बीच स्थिति बिगड़ने के बाद पथराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया। घटना में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी रिपोर्ट है। इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
पुलिस ने बाद में पथराव और हिंसा से जुड़े लोगों की पहचान शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक CCTV, ड्रोन रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पोस्ट की भी जांच की जा रही है।
15 लोगों को हिरासत में लिया गया
पुलिस ने मामले में 15 लोगों को हिरासत में लिया है। अलग-अलग थानों में FIR दर्ज कर पथराव और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों की जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक या उकसाने वाली सामग्री प्रसारित करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
कुछ रिपोर्टों में पांच सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख है। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में सिद्ध होना बाकी है।
मस्जिद कमेटी ने क्या कहा?
प्रशासन और मस्जिद कमेटी से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, प्रभावित हिस्से को हटाने का फैसला आपसी सहमति से हुआ था। शहर काजी ने भी लोगों से मौके पर भीड़ नहीं लगाने और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की।
मंगलवार को भी प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की कोशिश है कि सड़क चौड़ीकरण का काम सुरक्षा व्यवस्था के बीच आगे बढ़ाया जाए।
सोशल मीडिया बना जांच का अहम हिस्सा
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और पोस्ट की सत्यता की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि भ्रामक सामग्री कहां से शुरू हुई।
यह मामला दिखाता है कि संवेदनशील घटनाओं के दौरान अपुष्ट वीडियो और AI-generated सामग्री कितनी तेजी से लोगों तक पहुंच सकती है। इसलिए प्रशासन ने नागरिकों से किसी भी सूचना पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करने की अपील की है।
उज्जैन शाही मस्जिद विवाद में फिलहाल प्रशासन का फोकस सड़क चौड़ीकरण, कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया पर फैली सामग्री की जांच पर है। प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया समुदाय की सहमति से जारी होने की बात प्रशासन ने कही है, जबकि पथराव और अफवाह फैलाने के आरोपों में पुलिस कार्रवाई कर रही है। मामले की आगे की तस्वीर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से स्पष्ट होगी।





