मध्य प्रदेश

आत्मनिर्भर भारत के विजन को गति दे रहा मध्यप्रदेश, MSME और ODOP बने ताकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन GYAN’ यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर भारत का विजन देशभर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी सोच को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश स्तर पर नई दिशा दे रहे हैं। राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे बड़े आयोजन किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, रोजगार बढ़ाना और प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। आज मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हो रहा है जो स्थानीय संसाधनों और उत्पादों के दम पर आर्थिक विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।

ODOP योजना से मिली स्थानीय उत्पादों को नई पहचान

‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने मध्यप्रदेश के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। भोपाल की जरी-जरदोजी, धार का बाग प्रिंट, बुरहानपुर का केला, बड़वानी का अदरक, बालाघाट का चिन्नौर चावल और मंदसौर का लहसुन जैसे उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार उत्पादन, प्रशिक्षण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से इन उत्पादों को मजबूत समर्थन दे रही है। उज्जैन में 284 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यूनिटी मॉल भी ODOP उत्पादों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसी प्रयास का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर ODOP कार्यक्रम में मध्यप्रदेश को रजत पदक प्राप्त हुआ है।

GI टैग से बढ़ी प्रामाणिकता और बाजार मूल्य

भौगोलिक संकेतक (GI Tag) ने मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। GI टैग मिलने से उत्पादों की मौलिकता सुरक्षित रहती है और नकली उत्पादों पर रोक लगती है। इससे किसानों, कारीगरों और शिल्पकारों को उचित मूल्य मिल रहा है। प्रदेश की कई पारंपरिक कलाएं, कृषि उत्पाद और हथकरघा वस्तुएं GI टैग प्राप्त कर चुकी हैं, जिससे उनकी मांग में लगातार वृद्धि हुई है। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को भी संरक्षित रखने में मददगार साबित हो रहा है।

MSME सेक्टर बना प्रदेश की आर्थिक रीढ़

मध्यप्रदेश में वर्तमान में 24 लाख से अधिक MSME इकाइयां सक्रिय हैं, जो लगभग सवा करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। राज्य सरकार की MSME डेवलपमेंट पॉलिसी 2025 और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के तहत उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन और कौशल विकास का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के लिए आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने मार्च 2026 तक 600 से अधिक MSME इकाइयों को 375 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की है। इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिली है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

रेडीमेड गारमेंट्स, फर्नीचर और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इससे युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ वे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ODOP, GI टैग और MSME का संयुक्त प्रभाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और एक्सपोर्ट हब्स से जुड़कर स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार तक पहुंच रहे हैं। इस तरह मध्यप्रदेश ‘वोकल फॉर लोकल’ से आगे बढ़कर ‘ग्लोबल फॉर लोकल’ की दिशा में कदम बढ़ा रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के विजन को मजबूती प्रदान कर रहा है।

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