पेजेश्कियान के वायरल वीडियो पर स्वामी सतीशाचार्य बोले- असली मुद्दा जेन-जी और सनातन की समझ

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य महाराज का एक वीडियो सितंबर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वायरल क्लिप को इस दावे के साथ शेयर किया गया कि ईरानी राष्ट्रपति ने हिंदू धर्मगुरु के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। हालांकि, बाद में कई फैक्ट-चेक में यह दावा गलत पाया गया। लंबे वीडियो में पेजेश्कियान जमीन पर गिरे कागज/पेन को उठाने के लिए झुकते दिखाई देते हैं।
वायरल वीडियो को लेकर क्या था दावा?
सोशल मीडिया पर वायरल छोटे वीडियो में पेजेश्कियान स्वामी सतीशाचार्य के सामने झुकते दिखाई दे रहे थे। इसी आधार पर दावा किया गया कि उन्होंने धर्मगुरु के पैर छुए और सनातन परंपरा के अनुसार उनका आशीर्वाद लिया।
लेकिन फैक्ट-चेक में सामने आया कि वायरल क्लिप को क्रॉप करके शेयर किया गया था। अलग एंगल और लंबे वीडियो में घटनाक्रम कुछ अलग नजर आता है। कार्यक्रम में मौजूद जैन मुनि आचार्य लोकेश मुनि और वहां मौजूद एक कैमरापर्सन ने भी बताया कि पेजेश्कियान किसी वस्तु को उठाने के लिए नीचे झुके थे।
स्वामी सतीशाचार्य ने इंटरव्यू में क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर स्वामी सतीशाचार्य महाराज ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा कि जिस तरह से सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर चर्चा हो रही है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण दूसरे सामाजिक मुद्दे हैं। उन्होंने खास तौर पर जेन-जी को लेकर चर्चा करने की जरूरत बताई।
उन्होंने संकेत दिया कि किसी वीडियो के एक हिस्से को देखकर पूरे घटनाक्रम की व्याख्या करना उचित नहीं है। फैक्ट-चेक रिपोर्टों में भी वायरल दावे को गलत बताया गया है।
भारत-ईरान संबंधों पर भी रखी बात
स्वामी सतीशाचार्य ने भारत और ईरान के बीच पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में गुरु परंपरा और अलग-अलग धर्मों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है।
उन्होंने बताया कि उन्हें ईरान में सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, हालांकि वह वहां नहीं जा सके। उनके मुताबिक भारत और ईरान के बीच राजनीतिक संबंधों के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव भी पुराना है।
वायरल वीडियो जिस कार्यक्रम का हिस्सा था, उसमें ईरानी राष्ट्रपति ने भारत में धार्मिक नेताओं, विद्वानों और अन्य लोगों से मुलाकात की थी। यह कार्यक्रम 2026 BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में आयोजित गतिविधियों का हिस्सा था।
सनातन धर्म को लेकर क्या बोले?
सनातन धर्म को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्वामी सतीशाचार्य ने कहा कि सबसे पहले ‘सनातन’ के अर्थ को समझना जरूरी है। उन्होंने सनातन को ऐसी परंपरा के रूप में बताया, जिसमें अलग-अलग धर्मों और लोगों के प्रति सम्मान की भावना शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में हिंदू, यहूदी, ईसाई और इस्लाम सहित अलग-अलग धार्मिक समुदायों के प्रति सम्मान की बात की जाती रही है। उनके मुताबिक सनातन का संदेश सद्भाव और सभी को साथ लेकर चलने से जुड़ा है।
फैक्ट-चेक में क्या सामने आया?
India Today और BOOM की फैक्ट-चेक रिपोर्टों के मुताबिक, पेजेश्कियान ने स्वामी सतीशाचार्य के पैर नहीं छुए थे। लंबे वीडियो में एक कागज और पेन जमीन पर गिरने के बाद पेजेश्कियान उसे उठाने के लिए झुकते नजर आते हैं। कार्यक्रम में मौजूद आचार्य लोकेश मुनि ने भी इसी घटनाक्रम की पुष्टि की।
ईरानी दूतावास से जुड़े बयान में भी कहा गया कि राष्ट्रपति जमीन पर गिरे एक पत्र को उठाने के लिए झुके थे। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल ‘पैर छूने’ वाले दावे को तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा
पेजेश्कियान और स्वामी सतीशाचार्य से जुड़ा वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर धार्मिक और सांस्कृतिक दावों के साथ शेयर किया गया, लेकिन फैक्ट-चेक में इसकी अलग तस्वीर सामने आई। वहीं, स्वामी सतीशाचार्य ने इस पूरे प्रसंग से आगे बढ़कर जेन-जी, भारत-ईरान संबंधों और सनातन धर्म की व्यापक अवधारणा पर अपनी बात रखी।





