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नई कार या मुसीबत का सौदा? वारंटी में खुली तकनीकी खामियों की परतें, ग्राहक ने शुभ मोटर्स व डीलरशिप पर लगाए गंभीर आरोप

रीवा। नई कार खरीदने का सपना उस समय चिंता और परेशानियों में बदल गया जब वारंटी अवधि के भीतर ही वाहन में लगातार तकनीकी खराबियां सामने आने लगीं। शिकायतकर्ता अमित कुमार पांडेय ने रीवा स्थित शुभ मोटर्स तथा माँ गायत्री ऑटोमोबाइल्स, करमेता, जबलपुर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी नई Maruti Suzuki Dzire VXI में शुरुआत से ही गंभीर तकनीकी खामियां थीं लेकिन उन्हें बार-बार अलग-अलग कारण बताकर गुमराह किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरे मामले में उन्हें मानसिक प्रताड़ना के साथ लाखों रुपये का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायत के अनुसार उन्होंने 14 जनवरी 2026 को नई कार खरीदी थी। महज 1527 किलोमीटर चलने के बाद ही वाहन में Check Engine Light जलने लगी। शिकायत लेकर जब वे रीवा के शुभ मोटर्स सर्विस सेंटर पहुंचे तो वहां वाहन की गहन तकनीकी जांच करने के बजाय केवल कंप्यूटर से फॉल्ट को हटाकर यह कह दिया गया कि समस्या समाप्त हो गई है। लेकिन कुछ ही किलोमीटर चलने के बाद दोबारा वही खराबी सामने आ गई।

प्रार्थी का आरोप है कि दूसरी बार शिकायत करने पर उन्हें 50 से 60 किलोमीटर वाहन चलाने की सलाह दी गई और कहा गया कि लाइट अपने आप बंद हो जाएगी। लगातार आग्रह के बाद 31 मार्च को बताया गया कि कार का थर्मोस्टेट वाल्व खराब है जिसे वारंटी में बदल दिया गया। इसके अगले ही दिन उन्हें सूचना दी गई कि वाहन के रेडिएटर में लीकेज है और रेडिएटर बदलने का खर्च स्वयं उठाना होगा। जब उन्होंने लीकेज का कारण पूछा तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि संभवतः उन्हें शुरुआत से ही खराब वाहन मिला था और इसकी जानकारी खरीदने वाली डीलरशिप से लें।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद वाहन में लगातार कूलेंट लॉस और पावर लॉस जैसी गंभीर समस्याएं आती रहीं। कई बार सर्विस सेंटर बुलाकर केवल कूलेंट टॉप-अप किया गया और वाहन को ठीक बताकर वापस कर दिया गया। उनका आरोप है कि शुभ मोटर्स के जीएम पुष्पेंद्र मिश्रा तथा मारुति सुजुकी के टीएसएम अतुल पराशर ने भी बार-बार वाहन चलाते रहने की सलाह दी और किसी बड़ी तकनीकी खराबी से इंकार किया।

मामला तब और गंभीर हो गया जब 27 अप्रैल 2026 को मेडिकल इमरजेंसी के कारण नागपुर जाते समय और लौटते वक्त हाईवे पर वाहन में अचानक पावर लॉस हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, एक समय कार की रफ्तार इतनी कम हो गई कि पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रेलर से बड़ा हादसा होते-होते टल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ट्रेलर चालक समय रहते वाहन न मोड़ता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।

29 अप्रैल को दोबारा सर्विस सेंटर पहुंचने पर वाहन का कम्प्रेशन टेस्ट किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के बाद उन्हें बताया गया कि इंजन की कम्प्रेशन वैल्यू कम है और रिंग-पिस्टन बदलने की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने नई कार का इंजन खोलने पर आपत्ति जताई। बाद में जब उन्होंने मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया तो मारुति सुजुकी के अधिकारियों की ओर से अलग-अलग बयान दिए गए। पहले इंजन मरम्मत की बात कही गई, फिर बाद में वाहन को पूरी तरह सही बताया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने रेडिएटर क्षति, कम कम्प्रेशन,Recommended to Repair संदेश, निरीक्षण रिपोर्ट, फोटो, वीडियो तथा अन्य तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन आज तक कोई प्रमाणित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, निरीक्षण के दौरान फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की अनुमति भी नहीं दी गई तथा निरीक्षण का खर्च भी ग्राहक पर डालने की बात कही गई।

अंततः उन्हें बताया गया कि वाहन में पावर लॉस का कारण बाहर से खरीदा गया फ्लोर मैट है। शिकायतकर्ता ने इस दावे को तकनीकी रूप से पूरी तरह असंगत बताते हुए कहा कि यह स्पष्टीकरण पहले सामने आई इंजन, रेडिएटर, कूलेंट और कम्प्रेशन संबंधी समस्याओं से मेल नहीं खाता।

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