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KCC कंपनी के वाहनों की खुली पोल: बिना परमिट दौड़ रहे डंपरों पर आरटीओ की देर से कार्रवाई, मीडिया रिपोर्ट के बाद मचा हड़कंप

रीवा। रीवा जिले में रतहरा से चोरहटा तक सड़क निर्माण कार्य कर रही KCC कंपनी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कंपनी के भारी वाहनों को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब एक डंपर के पकड़े जाने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि कंपनी के कुछ वाहन बिना वैध परमिट और आवश्यक दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रहे थे जबकि जिम्मेदार विभाग लंबे समय तक आंखें मूंदे बैठा रहा।

जानकारी के अनुसार हाल ही में परिवहन विभाग की जांच के दौरान KCC कंपनी से जुड़े एक डंपर के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। सूत्रों का दावा है कि वाहन बिना वैध परमिट संचालित हो रहा था। इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इतने दिनों तक ऐसे वाहन परिवहन विभाग की नजरों से कैसे बचते रहे।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी KCC कंपनी के एक भारी वाहन द्वारा एक इनोवा कार को जोरदार टक्कर मारने का मामला सामने आया था। दुर्घटना इतनी गंभीर बताई गई थी कि वाहन को भारी नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद संबंधित थाने में मामला दर्ज कराया गया था और पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा हुई थी। उस समय भी सड़क निर्माण कार्य में लगे भारी वाहनों की कार्यप्रणाली ,उनकी गति, सुरक्षा मानकों और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। मामले को प्रमुखता से उठाते हुए मीडिया ऑडीटर द्वारा विस्तृत खबर प्रकाशित की गई थी जिसमें निर्माण कार्य में लगे वाहनों की वैधता और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े किए गए थे।

सूत्रों के अनुसार खबर प्रकाशित होने के बाद परिवहन विभाग हरकत में आया और जांच अभियान शुरू किया गया। जांच के दौरान दो वाहनों को जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है क्योंकि सड़क निर्माण कार्य में लगे वाहनों की संख्या काफी अधिक है और उनमें से कई के दस्तावेजों की जांच अभी भी नहीं हुई है।

ग्रामीणों और वाहन चालकों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लगे कई डंपर और भारी वाहन दिन-रात सड़कों पर दौड़ते हैं। कई बार ओवरलोडिंग तेज रफ्तार और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद कार्रवाई केवल चुनिंदा वाहनों तक सीमित दिखाई देती है।

लोगों का कहना है कि यदि एक वाहन के पकड़े जाने पर इतनी बड़ी अनियमितता सामने आ सकती है तो पूरे बेड़े की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बिना परमिट और दस्तावेजों वाले वाहन लंबे समय से विभागीय निगरानी की कमी का फायदा उठाकर सड़कों पर संचालित होते रहे।

अब जब परिवहन विभाग ने दो वाहनों को जब्त कर कार्रवाई शुरू की है तो निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल दो वाहनों तक सीमित रहेगी या फिर KCC कंपनी के पूरे वाहन बेड़े के दस्तावेजों, परमिट, फिटनेस और संचालन व्यवस्था की व्यापक जांच की जाएगी फिलहाल इस पूरे मामले ने एक बार फिर परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था सड़क निर्माण कंपनियों की जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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