Bilaspur school blast: 8वीं कक्षा के चार छात्र हिरासत में, ऑनलाइन खरीदा था सोडियम मेटल

Bilaspur school blast: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक निजी स्कूल के टॉयलेट में हुए धमाके के मामले में पुलिस ने 8वीं कक्षा के चार छात्रों को हिरासत में लिया है। यह धमाका पिछले सप्ताह हुआ था, जिसमें चौथी कक्षा की एक छात्रा घायल हो गई थी। पुलिस के अनुसार, इन छात्रों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सोडियम मेटल खरीदा था।
गुस्से में थे छात्र, बनाई साजिश
पुलिस ने मंगलवार को बताया कि ये छात्र अपनी एक शिक्षिका से नाराज थे और उन्होंने इस धमाके की साजिश रची थी। यह घटना 21 फरवरी को हुई थी, जब स्कूल के टॉयलेट में हुए विस्फोट में चौथी कक्षा की एक छात्रा झुलस गई थी। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और स्कूल के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान पांच छात्रों की संलिप्तता सामने आई। इन पांच में तीन लड़कियां भी शामिल थीं।
कैसे हुआ धमाका?
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रजनेश सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इन छात्रों ने ऑनलाइन एक वीडियो देखा था, जिसमें पानी के संपर्क में आते ही सोडियम मेटल के विस्फोट को दिखाया गया था। इसके बाद इन छात्रों में से एक ने अपने रिश्तेदार के आईडी का उपयोग करके ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से सोडियम मेटल मंगाया। इसके बाद इसे स्कूल ले जाकर टॉयलेट की टंकी के आउटलेट में रख दिया।
छात्रा के टॉयलेट में जाते ही हुआ धमाका
एसपी सिंह ने बताया कि दुर्भाग्यवश, जिस समय टॉयलेट में विस्फोट हुआ, उस समय चौथी कक्षा की एक छात्रा वहां मौजूद थी। जैसे ही उसने फ्लश दबाया, विस्फोट हो गया और वह घायल हो गई। धमाके की आवाज सुनकर परीक्षा में व्यस्त शिक्षिका तुरंत वहां पहुंची और टॉयलेट का दरवाजा तोड़ दिया। उन्होंने अंदर जाकर देखा तो छात्रा घायल अवस्था में पड़ी हुई थी। तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया।
चार छात्र हिरासत में, एक की तलाश जारी
पुलिस ने इस मामले में चार छात्रों को 23 फरवरी को हिरासत में लिया, जबकि एक छात्रा अपने रिश्तेदार के घर चली गई थी। पुलिस अब उसकी तलाश कर रही है। हिरासत में लिए गए छात्रों को किशोर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें सुधार गृह भेज दिया गया।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होगी जांच
पुलिस ने बताया कि यह जांच की जा रही है कि इन नाबालिग छात्रों को सोडियम मेटल ऑनलाइन कैसे मिल गया। पुलिस संबंधित ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से भी जानकारी एकत्र कर रही है और यह जांच कर रही है कि ऐसे प्रतिबंधित पदार्थों की बिक्री पर कैसे रोक लगाई जा सकती है।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं। स्कूल प्रशासन से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गतिविधियों और इंटरनेट से मिलने वाली गलत जानकारी पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की जरूरत है।
माता-पिता और शिक्षकों को दी गई हिदायत
पुलिस और शिक्षा विभाग ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। खासकर यह देखा जाए कि वे इंटरनेट पर क्या सर्च कर रहे हैं और किस तरह की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। स्कूलों को भी सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय अपनाने और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बच्चों में बढ़ती आक्रामकता और इंटरनेट से गलत जानकारी प्राप्त करने का परिणाम हो सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और उनकी भावनाओं को समझने की जरूरत है।
बिलासपुर स्कूल ब्लास्ट की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे इंटरनेट की गलत जानकारी और आक्रोश के कारण बच्चे गलत कदम उठा सकते हैं। इस मामले में पुलिस और शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है, लेकिन यह जरूरी है कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए स्कूल, माता-पिता और समाज को मिलकर काम करना होगा।