

रीवा/डभौरा। नगर परिषद डभौरा में कथित फर्जी संविलियन का मामला अब बड़ा प्रशासनिक घोटाला बनता नजर आ रहा है। वर्षों से उठ रहे सवालों के बीच मध्यप्रदेश शासन की जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। जांच रिपोर्ट ने उन दावों को बल दिया है जिनमें पंचायत अभिलेखों में हेराफेरी कर कुछ व्यक्तियों को नगर परिषद में संविलियन कराने का आरोप लगाया गया था।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत डभौरा, अकौरिया, मगडौर कोटा, गेदुरहा, पनवार और लटियार को मिलाकर नगर परिषद डभौरा का गठन किया गया था। आरोप है कि नगर परिषद गठन के बाद कुछ लोगों को पंचायतों में कार्यरत दिखाने के लिए अभिलेखों में बदलाव किए गए और बाद में उन्हें संविलियन का लाभ दिलाया गया।
मामले की शिकायत शासन स्तर तक पहुंचने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जांच कराई गई। जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए। प्रतिवेदन में शिकायत को सही माना गया और पाया गया कि संविलियन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि कुछ व्यक्तियों के नाम पंचायत रिकॉर्ड में बाद में जोड़े गए थे। इसके बाद उन्हें नगर परिषद में संविलियन का लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई गई। शासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
बताया जा रहा है कि नगर परिषद डभौरा द्वारा पारित संविलियन संबंधी संकल्प क्रमांक-12 भी विवादों के केंद्र में रहा। मामले की सुनवाई संभागीय कार्यालय रीवा में की गई जहां संबंधित पक्षों और अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए। दस्तावेजों की जांच और तथ्यों के परीक्षण के बाद शासन ने कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में शिकायत सही पाई गई है तो फर्जी संविलियन से लाभ लेने वालों पर क्या कार्रवाई होगी? क्या अवैध तरीके से हासिल पदों को निरस्त किया जाएगा? और क्या सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा?
नगर परिषद डभौरा का यह मामला अब पूरे रीवा संभाग में चर्चा का विषय बन गया है। शासन के ताजा आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और लोगों की निगाहें आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।





