गोवा में 97 योग्य वोटरों का मामला, SIR के दौरान ECINet पर उठे गंभीर सवाल

गोवा में Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान 97 ऐसे मतदाताओं का मामला सामने आया है, जिन्हें स्थानीय Electoral Registration Officers यानी EROs ने जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के योग्य माना था। इसके बावजूद 21 फरवरी को प्रकाशित अंतिम सूची में इन सभी के नाम शामिल नहीं हुए। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आई है।
सात दिनों में भेजे गए आठ ईमेल
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 से 17 फरवरी के बीच गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने चुनाव आयोग को आठ बार ईमेल और पत्र भेजे। इनमें ECINet में ‘रोल बैक’ या पुराने फैसले को पलटने की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। वजह यह थी कि EROs ने दस्तावेज और आपत्तियां सुनने के बाद कुछ पुराने निष्कासन आदेशों को बदलने का फैसला किया था, लेकिन सॉफ्टवेयर में उसे दर्ज करने की सुविधा नहीं थी।
EROs ने सुनवाई के बाद माना योग्य
मामला उन मतदाताओं से जुड़ा था, जिनके रिकॉर्ड में SIR के दौरान ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार उन्हें अपनी बात रखने और दस्तावेज पेश करने का मौका दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, गोवा के EROs ने सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद 97 मतदाताओं को पात्र माना और पहले लिए गए हटाने के फैसले को पलटने की जरूरत बताई।
तकनीकी व्यवस्था बनी अड़चन
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय गोयल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आयोग को उन मामलों की जानकारी दी गई थी, जिन्हें शामिल किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, इन मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के कारण फ्लैग किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि ERO स्तर पर मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए ECINet में कोई व्यवस्था होनी चाहिए थी।
चुनाव आयोग के IT सिस्टम पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के एक उप निर्वाचन आयुक्त ने भी IT विभाग को लिखा था कि सिस्टम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जरूरी कार्रवाई को रोक नहीं सकता और EROs के फैसले के अनुसार रिकॉर्ड प्रकाशित करने की सुविधा दी जानी चाहिए। इसके बावजूद 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हुई और 97 नाम उसमें दिखाई नहीं दिए।
मामला केवल 97 वोटरों तक सीमित नहीं
इस घटनाक्रम ने मतदाता सूची तैयार करने में केंद्रीय IT सिस्टम और राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर बहस को जन्म दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और IT सिस्टम में बदलावों को लेकर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने हालांकि रिपोर्ट में उठाए गए आंतरिक मतभेदों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
अब पारदर्शिता और जवाबदेही पर नजर
गोवा के CEO कार्यालय की वेबसाइट पर 2026 SIR की अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी को प्रकाशित होने की जानकारी उपलब्ध है। ऐसे में 97 योग्य पाए गए मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में क्यों नहीं जुड़ सके, यह सवाल अब प्रक्रिया की पारदर्शिता और तकनीकी व्यवस्था दोनों से जुड़ गया है।गोवा के 97 मतदाताओं का मामला यह दिखाता है कि मतदाता सूची की शुद्धता केवल जमीनी जांच पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस जांच के फैसलों को डिजिटल सिस्टम में सही तरीके से दर्ज करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अब इस पूरे घटनाक्रम में जवाबदेही और सुधार की जरूरत पर ध्यान रहेगा।





