करहिया में बड़ा खेल! किसान योजना का ट्रांसफार्मर, आरडीएसएस के खंभे और फायदा कथित अवैध प्लॉटिंग को? विभाग-भू-माफिया गठजोड़ पर उठे गंभीर सवाल

रीवा। जिले के करहिया क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सुविधा देने के उद्देश्य से स्वीकृत किसान योजना के ट्रांसफार्मर तथा आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत लगाए गए बिजली खंभों और लाइन का लाभ कथित रूप से निजी एवं अवैध प्लॉटिंग क्षेत्र को पहुंचाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और लोग पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करहिया क्षेत्र में स्थापित 25 केवीए ट्रांसफार्मर कृषि उपयोग और किसानों की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वीकृत किया गया था। लेकिन अब इसी ट्रांसफार्मर से जुड़े नेटवर्क का उपयोग ऐसे क्षेत्र तक बिजली पहुंचाने के लिए किया जा रहा है जहां कथित रूप से निजी प्लॉटिंग का विकास किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यह आरोप सही हैं तो यह सीधे-सीधे सरकारी योजनाओं के उद्देश्य के विपरीत है और इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर जनहित के लिए स्वीकृत संसाधनों का लाभ निजी हितों तक कैसे पहुंच रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि जिस क्षेत्र में बिजली लाइन और खंभों का विस्तार किया गया है वहां अभी तक कोई पूर्ण विकसित और विधिवत स्वीकृत आवासीय कॉलोनी अस्तित्व में नहीं है। इसके बावजूद आरडीएसएस योजना के तहत विकसित अधोसंरचना वहां तक पहुंचने से लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि किसी निजी डेवलपर या भू-स्वामी द्वारा प्लॉटिंग की जा रही है तो विद्युत अधोसंरचना की व्यवस्था नियमानुसार संबंधित पक्ष द्वारा की जानी चाहिए न कि किसानों और ग्रामीणों के लिए बनाई गई योजनाओं के माध्यम से।
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब करहिया और आसपास के कई गांव आज भी लो-वोल्टेज, ओवरलोड ट्रांसफार्मर और बार-बार बिजली कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब विभागीय प्राथमिकता आखिर क्या है? कई किसान वर्षों से अतिरिक्त ट्रांसफार्मर और नई लाइन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में कथित अवैध प्लॉटिंग तक बिजली सुविधाएं पहुंचने की खबरों ने ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ा दी है।
वही लोगों ने आरोप लगाया है कि बिना विभागीय संरक्षण के इस प्रकार का कार्य संभव नहीं है। यही कारण है कि अब क्षेत्र में बिजली विभाग और भू-माफिया के बीच संभावित मिलीभगत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो विभाग को संबंधित ट्रांसफार्मर, लाइन विस्तार, स्वीकृति आदेश और लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, ऊर्जा विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि किसान निधि से स्थापित ट्रांसफार्मर और आरडीएसएस योजना के खंभों का वास्तविक उपयोग किन उपभोक्ताओं के लिए किया जा रहा है। जनता का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।





