
सतना/रीवा। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे प्रहार-2.0 अभियान के दावों के बीच भोपाल STF की एक बड़ी कार्रवाई ने रीवा रेंज से लेकर सतना तक पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सतना के टिकुरिया टोला क्षेत्र में STF द्वारा की गई कार्रवाई में करीब 2.5 क्विंटल गांजा और 60 पेटी कोरेक्स सिरप बरामद किए जाने की खबर ने पूरे विंध्य क्षेत्र में हलचल मचा दी है।
यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले ही रीवा रेंज के आईजी द्वारा यह दावा किया गया था कि कोरेक्स के अवैध कारोबार का लगभग सफाया कर दिया गया है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि यदि कोरेक्स का नेटवर्क लगभग समाप्त हो चुका था तो फिर STF को इतने बड़े स्तर की कार्रवाई के लिए इनपुट कहां से मिले? और यदि इनपुट मौजूद थे तो स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र उन तक क्यों नहीं पहुंच पाया?
जानकारी के अनुसार पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के निर्देश और STF DIG राहुल लोढ़ा के नेतृत्व में टीम को विशेष टास्क दिया गया था। STF ने गोपनीय तरीके से काम करते हुए रीवा और सतना क्षेत्र में पड़ाव डाला सूचनाएं जुटाईं और फिर कार्रवाई को अंजाम दिया। हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि पूरी कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यहीं से कई नए सवाल जन्म लेते हैं। रीवा रेंज में साइबर मॉनिटरिंग और तकनीकी निगरानी को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे हैं। रेंज स्तर की साइबर टीम से लेकर जिला स्तर की साइबर इकाइयों तक आधुनिक संसाधनों की बात कही जाती है। लेकिन जब STF ने एक बड़े नेटवर्क तक पहुंचकर कार्रवाई कर दी तब स्थानीय साइबर तंत्र आखिर आरोपियों तक क्यों नहीं पहुंच पाया? इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच चर्चा है कि यदि STF जैसी विशेष एजेंसी सीमित समय में ठोस सूचना जुटाकर बड़ी सफलता हासिल कर सकती है तो स्थानीय स्तर पर चल रहे अभियानों को ऐसी सफलता क्यों नहीं मिल रही। कई लोग इसे प्रहार-2.0 के लिए आईना बता रहे हैं।
लोगो का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल अभियान चलाने या प्रेस विज्ञप्तियां जारी करने से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए मजबूत खुफिया नेटवर्क तकनीकी निगरानी और कार्रवाई की स्पष्ट मंशा आवश्यक होती है। STF की कार्रवाई ने यही संदेश दिया है कि जब इरादा साफ हो और रणनीति मजबूत हो तो बड़े से बड़ा नेटवर्क भी कानून की पकड़ से नहीं बच सकता।
वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा रेंज और सतना जिले में चल रहे नशा विरोधी अभियानों की वास्तविक स्थिति पर बहस छेड़ दी है। आखिर वह कौन-सी कड़ी थी जो स्थानीय एजेंसियों की पकड़ से बाहर रही लेकिन STF की नजरों से नहीं बच सकी? क्या खुफिया तंत्र में कहीं चूक हुई या फिर समन्वय की कमी रही? फिलहाल STF की इस कार्रवाई ने एक बात तो साफ कर दी है कि नशे का नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2.5 क्विंटल गांजा और 60पेटी कोरेक्स की बरामदगी ने यह साबित कर दिया है कि चुनौती अभी भी मौजूद है।






