उज्जैन में दर्शन के लिए लगी कतार में अफरा-तफरी, गेट खुलते ही भगदड़, बैरिकेड्स गिरे और श्रद्धालु घायल हुए

उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी लंबी कतार में सोमवार को अचानक अफरा-तफरी मच गई। करंट फैलने की अफवाह के बाद श्रद्धालु घबराकर भागने लगे। बैरिकेड्स से टकराने और गिरने से कई लोग घायल हुए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
करंट की अफवाह से मची अफरा-तफरी
श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी थी। इसी दौरान बैरिकेडिंग के अंदर डीपी के पास करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। देखते ही देखते कतार में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
बैरिकेड्स से टकराकर कई श्रद्धालु घायल
अफरा-तफरी के दौरान कई श्रद्धालु बैरिकेड्स से टकराकर गिर पड़े। कुछ लोगों के पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट आई। घायलों में उज्जैन, ग्वालियर, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से आए श्रद्धालु शामिल हैं। सभी को उपचार के लिए चरक अस्पताल ले जाया गया।
सागर के दोनों पैरों में आई गंभीर चोट
पीड़ित सागर के मुताबिक वह रात करीब एक बजे श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर की लाइन में लगा था। कई घंटे के सफर के बाद वह उज्जैन पहुंचा था और करीब दो घंटे कतार में खड़ा रहा। आरती के समय श्रद्धालुओं को रोक दिया गया था। इसके बाद अचानक गेट खुलने से भीड़ आगे बढ़ी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
सागर ने बताया कि इसी दौरान टेंट और बैरिकेड्स गिर गए। उसके दोनों पैर बैरिकेड्स के नीचे फंस गए। किसी तरह एक पैर निकाल लिया, लेकिन दूसरे पैर में गंभीर चोट आई। उसे अस्पताल पहुंचने से पहले काफी देर तक दर्द में रहना पड़ा।
आधे घंटे तक सड़क पर मदद का इंतजार
सागर का आरोप है कि हादसे के बाद वह करीब आधे घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा और मदद के लिए चिल्लाता रहा। उसके मुताबिक पुलिसकर्मियों से भी सहायता मांगी, लेकिन तत्काल मदद नहीं मिली। बाद में एक व्यक्ति ने उसे उठाया और हरसिद्धि माता के पास बने हेल्थ कैंप तक पहुंचाया। इसके करीब आधे घंटे बाद एंबुलेंस आई और उसे अस्पताल ले जाया गया।
श्रद्धालु ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
पीड़ित परिवार ने मंदिर की भीड़ प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सागर की मां मीनू का कहना है कि उनका बेटा भगदड़ में दबकर बुरी तरह घायल हुआ और शुरुआत में किसी ने उसकी मदद नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य श्रद्धालुओं को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ा।
वीआईपी दर्शन को लेकर भी उठे सवाल
सागर ने दावा किया कि वीआईपी दर्शन की व्यवस्था में श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही थी, जबकि सामान्य दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। उसके मुताबिक 300 रुपये की रसीद के जरिए वीआईपी दर्शन कराए जा रहे थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस-प्रशासन ने संभाली स्थिति
घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। कुछ समय के लिए दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई, लेकिन बाद में इसे सुचारू कर दिया गया। फिलहाल घायलों का चरक अस्पताल में उपचार जारी है।
महाकाल जैसे बड़े धार्मिक स्थल पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। ऐसे में एक अफवाह का भीड़ के बीच फैलना कितना खतरनाक हो सकता है, यह घटना इसकी गंभीर मिसाल है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्था को और मजबूत कैसे किया जाए, ताकि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।





