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कोरेक्स पर कार्रवाई का सच दबा, कांग्रेस का दिखावा उजागर
बिना पड़ताल IG का सम्मान, असली किरदार पर पर्दा!

रीवा। जिले में कोरेक्स की बिक्री में आई गिरावट को लेकर चल रही सख्त प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। बिना जमीनी हकीकत जाने और पूरे तथ्यों की पड़ताल किए कांग्रेस पार्टी के कुछ पदाधिकारी सीधे रीवा रेंज के आईजी का सम्मान करने पहुंच गए और बधाइयों के साथ पूरी कार्रवाई का श्रेय सौंप दिया। यह कदम अब सवालों के घेरे में है क्या कोरेक्स पर लगाम लगाने की पूरी पटकथा केवल रेंज स्तर पर ही लिखी गई थी या फिर इसके पीछे सरकार और उपमुख्यमंत्री की निर्णायक भूमिका को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?

सूत्रों के मुताबिक उपमुख्यमंत्री ने रीवा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और नशे के बढ़ते कारोबार पर रोक लगाने के लिए कोरेक्स जैसे घातक नशे को प्राथमिक मुद्दा बनाया था। इसी क्रम में उन्होंने सीधे यूपी सरकार और पुलिस मुख्यालय से समन्वय स्थापित किया। इसके बाद उप पुलिस के निर्देश पर नशा माफियाओं के खिलाफ सुनियोजित और लगातार कार्रवाई शुरू हुई सप्लाई चेन तोड़ी गई तस्करों की धरपकड़ हुई और कई ठिकानों पर दबिश दी गई। इन सख्त कदमों का ही नतीजा रहा कि कोरेक्स की बिक्री पर काफी हद तक अंकुश लग पाया।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कांग्रेस नेताओं ने न तो इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि जानने की कोशिश की न ही यह समझा कि असली निर्णय कहां से आया और दबाव किस स्तर पर बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि रीवा रेंज के अधिकारी बैठे बैठे पूरे अभियान का श्रेय ले गए जबकि कांग्रेस नेता केवल गुलदस्ता लेकर फोटो सेशन तक सीमित रह गए। यह सम्मान कम और राजनीतिक जल्दबाजी का प्रदर्शन ज्यादा नजर आया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यही कांग्रेस पार्टी वर्षों तक रीवा को विकास की दौड़ से पीछे रखे रही। उस दौर में नशा बेरोजगारी और अव्यवस्था जैसे मुद्दों पर ठोस पहल नहीं हुई। आज जब सख्त कार्रवाई के परिणाम सामने आए तो तथ्यों के बजाय दिखावे को प्राथमिकता दी जा रही है। यह रवैया कांग्रेस की कथित जनहितैषी राजनीति पर भी सवाल खड़े करता है।

स्थानीय नागरिकों में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी चर्चा है। लोगों का कहना है कि असली मुद्दे नशा मुक्ति रोजगार के अवसर और स्थायी विकास अब भी उपमुख्यमंत्री और सरकार की पहल तक ही सीमित रह जाते हैं, जबकि जमीनी राजनीति केवल प्रतीकात्मक सम्मान और श्रेय लेने की होड़ में उलझी रहती है।

कुल मिलाकर कोरेक्स पर कार्रवाई का यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं रहा बल्कि राजनीतिक ईमानदारी और श्रेय की राजनीति का आईना बन चुका है। सवाल साफ है क्या कांग्रेस वाकई जनहित की लड़ाई लड़ रही है या फिर सच्चाई को दरकिनार कर सस्ती राजनीति में उलझी हुई है?

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