NDPS कांड में सेटिंग से लेकर देरी तक बड़ा खेल? सेमरिया मामला गरमाया IG,DIG,SP की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

रीवा। NDPS Act से जुड़े सेमरिया कांड ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। पहले आरोपियों को घंटों थाने में बैठाकर फोन कॉल के बाद छोड़ने का मामला सामने आया और अब कार्रवाई में हो रही देरी ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कई दिन बीत जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला कोटर थाना जिला सतना के अबेर गांव से पकड़े गए दो आरोपियों अभिषेक और अमित से जुड़ा है जिन्हें NDPS Act के तहत हिरासत में लिया गया था। सूत्रों के मुताबिक दोनों को सेमरिया थाने लाकर करीब 6 घंटे तक निरीक्षक के कमरे में बैठाकर रखा गया और बाद में एक फोन कॉल के बाद छोड़ दिया गया। यह घटनाक्रम सामने आते ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार शुरू हो गई थी।
जानकारी के अनुसार आरोपियों को थाने में विधिवत गिरफ्तारी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने के बजाय सीधे निरीक्षक कक्ष में बैठाया गया। इस दौरान कथित रूप से साथ बैठक का दौर चला जबकि NDPS Act जैसे सख्त कानून में हर प्रक्रिया का विधिसम्मत होना अनिवार्य होता है। इसी बीच सेमरिया थाना प्रभारी जो उस समय रीवा में निजी कार्य से मौजूद थे उनसे लगातार फोन पर बातचीत होती रही और देर शाम अचानक दोनों आरोपियों को छोड़ने का फैसला लिया गया।
मामले में अब एक और सनसनीखेज पहलू सामने आ रहा है। चर्चा यह भी है कि आरोपियों को केवल थाने में ही नहीं बल्कि निजी निवास तक ले जाकर बैठाने और वहीं से फैसला होने की बात भी जांच के दायरे में शामिल की गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस एंगल ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी समय रहते आईजी, डीआईजी, एसपी और एडिशनल एसपी तक पहुंच चुकी थी तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जांच को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है या फिर अंदरखाने कोई दबाव काम कर रहा है?
स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि कहीं दागी पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास तो नहीं हो रहा। NDPS Act जैसे कड़े कानून में इस तरह की कथित लापरवाही और फिर कार्रवाई में देरी दोनों ही स्थितियां पुलिस की साख को नुकसान पहुंचाने वाली मानी जा रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि नशे जैसे गंभीर अपराधों में भी इस तरह की ढिलाई और देरी बरती जाएगी तो कानून का डर खत्म हो जाएगा और अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। इससे न केवल अपराध नियंत्रण पर असर पड़ेगा बल्कि आम जनता का विश्वास भी डगमगा सकता है।
फिलहाल सेमरिया कांड रीवा रेंज के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल क्या NDPS कांड में सेटिंग के बाद अब सिस्टम की चुप्पी भी उजागर हो रही है या फिर जल्द ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई देखने को मिलेगी?





