
मैहर. मैहर में अवैध शराब से भरे कथित कंटेनर को लेकर उठी शिकायतें अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर रही हैं। मामला अब केवल एक खेप की जब्ती तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने सरकार प्रशासन और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कार्रवाई जितनी तेजी से शुरू हुई उतनी ही रहस्यमय ढंग से ठंडी भी पड़ गई।
सूत्रों के अनुसार मैहर में भारी मात्रा में शराब से लदा एक कंटेनर पकड़ा गया था। शुरुआती संकेतों से लगा कि यह किसी बड़े तस्करी नेटवर्क पर चोट है। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि अब पूरे गिरोह का पर्दाफाश होगा और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे। लेकिन अचानक मामले की धार कुंद पड़ती दिखाई दी। न व्यापक गिरफ्तारी हुई न सप्लाई चेन का खुलासा और न ही कोई विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग सामने आई। इसी के बाद सेटिंग और अंदरूनी समझौते की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी गई थी तो उसका विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? क्या कंटेनर की आवाजाही, परिवहन मार्ग और संभावित सप्लाई नेटवर्क की गहन जांच हुई? या फिर मामला सीमित दायरे में समेट दिया गया? इन सवालों ने पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बना दिया है।
रीवा संभाग जिसमें मैहर शामिल है पहले भी अवैध शराब और नशीले पदार्थों की आवाजाही को लेकर सुर्खियों में रहा है। ऐसे में यह मामला संभाग की छवि पर सीधा असर डाल रहा है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि कार्रवाई पारदर्शी और निष्पक्ष है, तो प्रशासन को पूरे घटनाक्रम का खुला विवरण जारी करना चाहिए।
पुलिस प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई है और किसी प्रकार की सेटिंग या दबाव की बात पूरी तरह निराधार है। उनका दावा है कि जब्ती पंचनामा दस्तावेजी प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएँ नियमों के तहत पूरी की गईं। हालांकि, विस्तृत तथ्य सार्वजनिक न होने से संदेह की गुंजाइश बनी हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कॉल डिटेल कंटेनर की मूवमेंट हिस्ट्री जब्ती रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इससे न केवल आरोपों का सच सामने आएगा बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
मैहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब की उपलब्धता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। छापेमारी और जब्ती की खबरें तो आती हैं लेकिन बड़े नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार की जानकारी कम ही मिलती है। ऐसे में यह कंटेनर कांड जनता के मन में कई शंकाएं छोड़ गया है।
यह मामला अब केवल एक कंटेनर की कहानी नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता जवाबदेही और कानून के राज की परीक्षा बन चुका है। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या सख्त और निष्पक्ष जांच से सच सामने आएगा या फिर यह प्रकरण भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ धुंधला पड़ जाएगा।





