अंतर्राष्ट्रीय

LoC पार से हथियार पहुंचाने के आरोप, NIA ने कश्मीर में चलाया सर्च ऑपरेशन

कश्मीर में उग्रवाद से जुड़े मामलों की जांच के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बारामूला में बड़ी कार्रवाई की है। तिहाड़ जेल में बंद एक आरोपी के घर पर हुई तलाशी ने एक बार फिर उन नेटवर्कों की ओर ध्यान खींचा है, जिनकी जांच एजेंसी कई वर्षों से कर रही है।

बारामूला में NIA का तलाशी अभियान

National Investigation Agency (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के Baramulla जिले के कनिस्पोरा इलाके में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उग्रवाद से जुड़े एक मामले की जांच के तहत की गई, जिसकी पड़ताल एजेंसी लंबे समय से कर रही है।

अधिकारियों के अनुसार टीम ने शाहीन अहमद लोन के आवास पर छापा मारा। लोन फिलहाल इसी मामले में कई वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद है।

संपत्ति जब्ती की कार्रवाई के बाद छापा

यह तलाशी ऐसे समय में हुई है जब जम्मू स्थित विशेष NIA अदालत ने आरोपी की अचल संपत्तियों को जब्त करने संबंधी एजेंसी की याचिका को मंजूरी दी थी। यह कार्रवाई Unlawful Activities (Prevention) Act के प्रावधानों के तहत की जा रही है।

2020 के हथियार बरामदगी मामले से जुड़ा है केस

जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार मामला जनवरी 2020 में कुलगाम जिले के मीर बाजार क्षेत्र में एक वाहन से कथित हथियार और गोला-बारूद बरामद होने से जुड़ा है। इसके बाद मामला केंद्रीय स्तर पर पहुंचा और जांच की जिम्मेदारी NIA को सौंप दी गई।

शाहीन लोन पर क्या आरोप हैं?

NIA का आरोप है कि शाहीन अहमद लोन प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करता था। एजेंसी के अनुसार वह कथित तौर पर नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से हथियार और अन्य सामग्री लाने तथा उन्हें घाटी में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क तक पहुंचाने में मदद करता था।

हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

तलाशी में क्या मिला?

अधिकारियों ने फिलहाल तलाशी अभियान के दौरान बरामद किसी सामग्री का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। जांच एजेंसी द्वारा एकत्र किए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों की लगातार निगरानी

जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद से जुड़े मामलों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में वित्तीय नेटवर्क, लॉजिस्टिक सपोर्ट और कथित ओवरग्राउंड नेटवर्क की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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