एमपी में बढ़ता नशे का व्यापार: गली मोहल्लों तक फैलती मादक पदार्थों की तस्करी रोकथाम में नाकाम सिस्टम चिंता का विषय

मध्यप्रदेश में नशे का अवैध व्यापार लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। शहरों से लेकर कस्बों और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक मादक पदार्थों की तस्करी बेधड़क जारी है। स्थिति यह है कि अब गली मोहल्लों में भी नशे के सौदागरों की सक्रियता साफ देखी जा सकती है। यह न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य को भी तेजी से बर्बाद कर रहा है।
प्रदेश में पुलिस और प्रशासन लगातार कार्रवाई का दावा करते हैं लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर दिखाई देती है। जगह–जगह छापेमारी और गिरफ्तारी के बावजूद नशे का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के व्यापार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि केवल ऊपरी कार्रवाई से इस पर काबू पाना मुश्किल है। जरूरत बड़े नेटवर्क को तोड़ने और सप्लायर डिस्ट्रीब्यूशन चैन को उखाड़ फेंकने की है।
गली मोहल्लों में आसानी से उपलब्ध हो रहा नशा
जहां पहले नशा गुपचुप तरीके से कुछ खास इलाकों में मिलता था वहीं अब स्थिति यह हो गई है कि हर छोटे मोहल्ले में स्मैक गांजा नशीली गोलियां और इंजेक्शन जैसे पदार्थ आसानी से उपलब्ध होने लगे हैं। स्कूल कॉलेज के आसपास भी इसकी बिक्री बढ़ गई है जिससे किशोर और युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई जिलों में यह देखने को मिला है कि नाबालिगों तक को नशा बेचने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
तस्करों की नई रणनीति छोटी छोटी खेप अनेक सप्लायर
तस्कर अब बड़े स्तर पर माल ढोने के बजाय छोटी छोटी खेप में सप्लाई कर रहे हैं। इससे पुलिस को सबूत और नेटवर्क पकड़ने में मुश्किल होती है। कई तस्कर स्थानीय लोगों को कुछ मामूली पैसों का लालच देकर उन्हें डिलीवरी बॉय की तरह इस्तेमाल करते हैं।
गांवों में गांजे की खेती भी कुछ क्षेत्रों में फिर बढ़ने लगी है जिसे नर्मदा बेल्ट और विंध्य क्षेत्र के जंगलों में छिपाया जाता है। पुलिस कार्रवाई के बावजूद हर वर्ष हजारों किलो गांजा जब्त होने की खबरें सामने आती हैं जो साफ बताती हैं कि उत्पादन और तस्करी दोनों गति पकड़ चुके हैं।
युवाओं में नशे की खतरनाक लत
नशे का असर सबसे अधिक युवा पीढ़ी पर हो रहा है। 14 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में नशे की लत लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नशा केवल स्वास्थ्य को तबाह नहीं करता बल्कि अपराधों को भी जन्म देता है।
नशे के आदी युवक चोरी लूट मारपीट और घरेलू हिंसा जैसे अपराधों में तेजी से संलिप्त होने लगे हैं। कई मामलों में नशे की खुराक पूरी करने के लिए वे अवैध गतिविधियों का सहारा ले रहे हैं। इससे समाज में असुरक्षा और भय का वातावरण बन रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं
बीते महीनों में पुलिस ने कई बड़े मामलों में तस्करों की गिरफ्तारी और नशे की खेप बरामद की है लेकिन तस्करी का ग्राफ नीचे नहीं आ रहा। जानकारों का कहना है कि वर्तमान कार्रवाई घास काटने जैसी है जबकि जड़ें अब भी मजबूती से जमी हुई हैं।
कई जिलों में पुलिस व प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही या मिलीभगत के आरोप भी उठते रहे हैं। जब तक नशे के बड़े सप्लायर फाइनेंसर और नेटवर्क संचालकों को नहीं पकड़ा जाएगा तब तक नशे की रोकथाम असंभव है।





