CM मोहन यादव का बड़ा बयान, कहा- सरकार किसानों के साथ, भूमि पूलिंग एक्ट पर कांग्रेस का विरोध जारी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को भूमि पूलिंग एक्ट पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनकी भलाई के लिए कई अहम कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “मैं खुद एक किसान का बेटा हूं और राज्य का विकास हर हाल में होगा। हम किसानों के साथ हैं और उनकी जिंदगी सुधारने के लिए सरकार काम करती रहेगी।”
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने भूमि पूलिंग एक्ट का विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चेतावनी दी है कि अगर इस एक्ट को लागू किया जाता है तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर विरोध करेगी। इसके साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भी भूमि पूलिंग एक्ट के खिलाफ मुखर विरोध जताया। उनका आरोप है कि मोहन यादव की सरकार किसान विरोधी कदम उठा रही है।
कांग्रेस का विरोध और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं
भूमि पूलिंग एक्ट के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस एक्ट को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह किसानों के हित में नहीं है। पटवारी ने किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप लगाते हुए सरकार से इसका विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि यह एक्ट किसान की जमीन को बिना उचित मुआवजे के औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध करवा सकता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।
वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भी इस एक्ट का विरोध करते हुए इसे “किसान विरोधी” करार दिया। उनका कहना है कि इस तरह के कदमों से सरकार किसानों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि मोहन यादव सरकार उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रही है और उनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ जमीनों का अधिग्रहण करना है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीति
भूमि पूलिंग एक्ट को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से बढ़ते विरोध को भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि भूमि पूलिंग एक्ट के जरिए राज्य सरकार किसानों के हक में काम करने के बजाय उन्हें संकट में डालने की योजना बना रही है। इस विरोध के बीच, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों का कल्याण करना है, और वह हर हाल में किसानों के साथ खड़ी रहेगी।
भूमि पूलिंग एक्ट को लेकर सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि भूमि पूलिंग एक्ट राज्य सरकार की नई विकास योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसानों को उद्योगों और निवेशकों के साथ समान अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह एक्ट किसानों को अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता देता है, और यह सुनिश्चित करता है कि उनकी जमीनों का उपयोग उनके फायदे के लिए किया जाए।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी भूमि पूलिंग एक्ट का समर्थन किया और कहा कि यह एक्ट गुजरात मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है। उनके अनुसार, यह कानून 40 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर लागू होगा, जिससे बड़े उद्योगों को भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी। उनका कहना था कि यह कदम राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने और विकास के नए रास्ते खोलने के लिए महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस का विरोध बढ़ने के संकेत
भूमि पूलिंग एक्ट को लेकर विरोध अब राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैलने लगा है। उज्जैन, भोपाल, और रतलाम से विरोध की आवाजें उठ रही हैं। उज्जैन के चिंतामणि मालवीय, जो रतलाम जिले के अलोट से विधायक हैं, ने भी इस एक्ट पर असंतोष जताया है। उन्होंने इसे किसानों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। इसी तरह, कांग्रेस विधायक महेश परमल ने भी भूमि पूलिंग एक्ट का विरोध करते हुए इसे किसान विरोधी करार दिया है।
अब, कांग्रेस ने 28 मार्च से भूमि पूलिंग एक्ट के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। आंदोलन की शुरुआत सिंगरौली से होगी, और जीतू पटवारी ने किसान संगठनों से भी समर्थन मांगा है। कांग्रेस का कहना है कि अगर सरकार ने इस एक्ट को वापस नहीं लिया, तो वे और भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
भूमि पूलिंग एक्ट: क्या है इसका उद्देश्य?
भूमि पूलिंग एक्ट का उद्देश्य राज्य में बड़े निवेशकों और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराना है। इस एक्ट के तहत, सरकार किसानों से उनकी भूमि को एकत्रित कर सकती है और उन्हें मुआवजा प्रदान करती है। इसका उद्देश्य निवेशकों को भूमि मुहैया कराना है, ताकि राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल सके। हालांकि, इसका विरोध किसानों के अधिकारों के उल्लंघन के रूप में किया जा रहा है, क्योंकि इस एक्ट के जरिए किसानों की भूमि का अधिग्रहण बिना उनकी पूरी सहमति के किया जा सकता है।
भूमि पूलिंग एक्ट पर बढ़ते विरोध और मुख्यमंत्री की तरफ से दिए गए बयान के बाद यह साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस पर जो राजनीतिक खींचतान हो रही है, वह राज्य के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह किसानों के हित में काम कर रही है और भूमि पूलिंग एक्ट राज्य के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।