छत्तीसगढ

Chhattisgarh Naxalism: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का आतंक, 194 मारे गए, 801 गिरफ्तार और 742 ने आत्मसमर्पण किया

Chhattisgarh Naxalism: छत्तीसगढ़, जिसे नक्सलवाद का केंद्र माना जाता है, में इस वर्ष सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। नक्सलवाद का यह मुद्दा न केवल राज्य की सुरक्षा को चुनौती देता है, बल्कि यह विकास और शांति के प्रयासों में भी बाधा डालता है। इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक, सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ जो कार्रवाइयाँ की हैं, वे न केवल महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह साबित करती हैं कि सरकार इस समस्या को समाप्त करने के लिए गंभीर है।

नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई

2024 में छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशंस किए हैं। अब तक, 802 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 742 ने आत्मसमर्पण किया है। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ कितनी गंभीरता से काम कर रही है। इसके अलावा, सुरक्षा बलों ने 194 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। यह कार्रवाई न केवल राज्य की सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि समाज में भय के वातावरण को भी कम करती है।

केंद्रीय गृह मंत्री का समर्थन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि नक्सलवाद को खत्म किया जा सके, गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विशुन देव साय की सराहना की और कहा कि राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ जो ठोस कदम उठाए हैं, वे सराहनीय हैं।

नक्सलियों से युवाओं का अपील

अमित शाह ने नक्सलियों से अपील की है कि वे मुख्यधारा में लौट आएं। उन्होंने कहा कि जो युवा नक्सलवाद में शामिल हो गए हैं, वे समाज की मुख्यधारा में आकर अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं। यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि युवा देश का भविष्य होते हैं और यदि वे नकारात्मक गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो यह समाज के विकास में बाधा डालता है।

Chhattisgarh Naxalism: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का आतंक, 194 मारे गए, 801 गिरफ्तार और 742 ने आत्मसमर्पण किया

शून्य सहिष्णुता नीति

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई गई है। इसके तहत, नक्सलवाद के सभी रूपों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद और आतंकवाद को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक संयुक्त कार्य बल का गठन किया गया है, जो नक्सलवाद के खिलाफ कार्य करेगा और इसके नक्सलियों के ढांचे को खत्म करने के लिए काम करेगा।

हालिया ऑपरेशन में सफलता

हाल ही में, सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन में 31 नक्सलियों को मार गिराया है। यह ऑपरेशन नारायणपुर-दंतेवाड़ा सीमा पर दो दिन तक चला। मुख्यमंत्री विशुन देव साय ने कहा कि जब से बीजेपी सरकार ने छत्तीसगढ़ में सत्ता संभाली है, तब से नक्सलवाद के खिलाफ सफल अभियान चलाए जा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि सरकार नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

नक्सलवाद का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

नक्सलवाद न केवल छत्तीसगढ़ की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालता है। नक्सलियों के आतंक से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य ठप हो जाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास में रुकावट आती है, जिससे लोगों का जीवन स्तर प्रभावित होता है। इसके अलावा, नक्सलवाद का आतंक स्थानीय लोगों में डर और अशांति का माहौल बनाता है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

विकास की आवश्यकता

नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर ध्यान दिया जाए। सरकार को चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाए ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और वे नक्सलवाद के प्रलोभन से दूर रह सकें।

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