छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर बड़ा वार: बीजापुर में 22 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण!

छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा बल लगातार राज्य को नक्सलवाद मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ें लगातार हो रही हैं और उन्हें समाप्त किया जा रहा है। इस बीच नक्सली भी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण कर रहे हैं। ताजातरीन मामला बीजापुर जिले से सामने आया है, जहां रविवार को 22 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान सामने आई
बीजापुर जिले में हुए इस आत्मसमर्पण के बाद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन नक्सलियों पर 2 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। इनमें से आयातू पुणेम, पांडू कुंजम, कोसी तामो, सोना कुंजम और लिंगेश पदम के ऊपर 2 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा तिब्रु राम माडवी पर 1 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस के मुताबिक, “पुणेम को अंडर ग्राउंड माओवादी संगठन के आंध्र-ओडिशा सीमा (AOB) प्लाटून नंबर 1 का सदस्य बताया गया। पांडू और तामो क्रमशः प्लाटून नंबर 9 और 10 के सदस्य थे। सोना, तेलंगाना राज्य समिति के तहत प्लाटून पार्टी का हिस्सा था। माडवी जनताना सरकार का प्रमुख था।”
सरकार की राहत और पुनर्वास नीति
छत्तीसगढ़ सरकार ने बुधवार को छत्तीसगढ़ नक्सल आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 को मंजूरी दी। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को वित्तीय सहायता, पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कई प्रकार की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इनमें वित्तीय सहायता, पुनर्वास की व्यवस्था, शिक्षा और रोजगार के अवसर शामिल हैं।
अब तक कितने नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण?
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 2025 में अब तक बीजापुर जिले में 107 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। साथ ही सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 82 नक्सली मारे गए हैं। इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 90 से अधिक नक्सलियों की मौत हुई है और 164 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके साथ ही 143 नक्सलियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
कौन से जिले प्रभावित हैं नक्सलवाद से?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 15 जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं। ये जिले हैं – बीजापुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहला मंपुर अंबागढ़, खैरागढ़ छुईखदान गांडई, सुकमा, कबीरधाम और मुंगेली।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि 2013 में देश के 10 राज्यों के 126 जिले नक्सलवाद के प्रभाव में थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 9 राज्यों के 38 जिले रह गई है।
नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज
केंद्र और राज्य सरकार नक्सलवाद से निपटने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है। इस दौरान माओवादी संगठन के प्रभाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षाबलों का दबदबा बढ़ाया जा रहा है। सरकार नक्सलियों के आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित कर रही है और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए विभिन्न प्रकार की सहायता और पुनर्वास की योजनाएं चला रही है।
नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद, सरकार उन्हें हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। इसके तहत उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी, ताकि वे समाज के मुख्य धारा में वापस आ सकें और एक नया जीवन शुरू कर सकें।
नक्सलवाद से निपटने के लिए सरकार का दृढ़ निश्चय
छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जो इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में सरकार की रणनीति सफल हो रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को उनके नए जीवन के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।
अब यह देखना होगा कि क्या सरकार की यह योजना नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर पाने में सफल होगी, या फिर इस समस्या का समाधान दूरगामी होगा।