नियमों की धज्जियां उड़ा शिफ्ट हुई न्यू आदर्श आईटीआई! शिकायतों के बावजूद अफसर मौन, छात्रों के भविष्य पर बड़ा खतरा

मीडिया ऑडीटर, सेमरिया (रीवा) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्किल इंडिया मिशन योजना का उद्देश्य देश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर उन्हें रोजगार से जोड़ना है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही है। मध्यप्रदेश के रीवा जिले के सेमरिया में संचालित न्यू आदर्श आईटीआई इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है, जहां नियमों को दरकिनार कर संस्थान संचालन का मामला सामने आया है।
मिली जानकारी के अनुसार, न्यू आदर्श आईटीआई (कोड PU23000426) वर्ष 2014 से संचालित है और इसे इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में 120 छात्रों को प्रशिक्षण देने की मान्यता प्राप्त है। लेकिन आरोप है कि संस्थान प्रबंधन ने नियमों की अनदेखी करते हुए बिना किसी वैधानिक अनुमति के आईटीआई का स्थान बदल दिया।
बताया जा रहा है कि यह आईटीआई पहले रीवा रोड क्षेत्र में संचालित थी जिसे बाद में सतना रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास सेमरिया में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि नियमानुसार किसी भी आईटीआई को अपना स्थान बदलने से पहले संबंधित विभाग और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (DGT) से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद बिना अनुमति स्थान परिवर्तन कर संचालन जारी रखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले को लेकर कई बार लिखित शिकायतें भी की जा चुकी हैं। स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने संबंधित विभाग को इस अनियमितता से अवगत कराया लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो इस संस्थान में प्रशिक्षण ले रहे हैं। बिना अनुमति संचालित संस्थान में पढ़ाई करने वाले छात्रों की डिग्री और भविष्य दोनों पर संकट मंडरा सकता है।
वहीं शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि तकनीकी संस्थानों में नियमों का पालन बेहद आवश्यक है। यदि कोई संस्थान बिना अनुमति स्थान परिवर्तन करता है तो इससे न केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती है बल्कि उसकी मान्यता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी होती है ताकि अन्य संस्थानों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश जाए।
इस पूरे प्रकरण में क्षेत्रीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों विशेषकर संयुक्त संचालक कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बार-बार शिकायत मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया जिससे संस्थान प्रबंधन के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल यह मामला सेमरिया सहित पूरे रीवा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





