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गायब हुई कुंडली सुस्त पड़ा ऑपरेशन प्रहार: रेंज के आईजी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
कागजों में सिमटी कार्रवाई से नशे का कारोबार फिर विस्तृत

रीवा। रीवा रेंज की पुलिस व्यवस्था इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। कुछ माह पहले रेंज के आईजी गौरव राजपूत ने एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में यह दावा किया था कि उनके पास रेंज के कुछ पुलिसकर्मियों की पूरी कुंडली तैयार है। उन्होंने कहा था कि अनुशासनहीनता, संदिग्ध गतिविधियों और संभावित अवैध नेटवर्क से जुड़े पुलिसकर्मियों की जांच पूरी हो चुकी है और दोषियों पर जल्द कठोर कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन महीनों गुज़रने के बाद भी न तो उस कथित ‘कुंडली’ का कोई आधिकारिक खुलासा हुआ और न ही किसी बड़े पुलिसकर्मी पर हुई कार्यवाही की सूचना सार्वजनिक हुई। इससे स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जागरूक वर्गों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वह घोषणा, जो सार्वजनिक मंच से बड़े जोरदार तरीके से की गई थी, अब ठंडे बस्ते में क्यों पड़ गई।

देरी की वजह और जनता में बढ़ती शंकाएँ

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी तो उनके खिलाफ पारदर्शी कार्रवाई करने में इतनी देर क्यों हो रही है। नशे के व्यापार, अवैध गतिविधियों या अपराधियों से संभावित सांठगांठ जैसे मुद्दे किसी भी पुलिस रेंज की साख को सीधा प्रभावित करते हैं। ऐसे में लंबे समय से जारी शांति संदेह को और गहरा कर रही है।

कुछ लोग यह भी संकेत कर रहे हैं कि जांच में हो रही देरी कहीं किसी तरह के उच्च दबाव प्रोटेक्शन, या मैनेजमेंट का परिणाम तो नहीं। हालांकि ऐसी चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में यह विषय लगातार चर्चा में है। लोगों का मानना है कि यदि घोषणा के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह सिस्टम की कमजोर इच्छाशक्ति और आंतरिक ढीलापन दर्शाता है।

क्या ऑपरेशन प्रहार केवल कागज़ों में?

इधर एक और बड़ा सवाल उभरकर सामने आया हैरेंज में बड़े दावे करके शुरू किए गए ऑपरेशन प्रहार की रफ्तार आखिर क्यों थम गई? इस अभियान की शुरुआत अपराधियों, नशा तस्करों और संगठित नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआती दौर में पुलिस की कार्रवाई तेज दिखी, कई छापे पड़े, गिरफ्तारियाँ हुईं और अवैध नेटवर्कों पर दबाव दिखाई दिया।

लेकिन समय बीतते-बीतते इस अभियान की गति कम होती नज़र आ रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार एक बार फिर सक्रिय दिखाई देने लगा है। नए गैंगों का उभरना और पुराने नेटवर्कों का दोबारा सक्रिय होना जनता के बीच असंतोष का बड़ा कारण बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑपरेशन प्रहार की शुरुआत जितनी दमदार रही, उसका प्रभाव उतना स्थायी नहीं रहा। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या अभियान केवल कागजों और रिपोर्टों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीन पर उसका असर लगातार घटता जा रहा है।

कागज़ी सख्ती और ज़मीनी हकीकत का फर्क

कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से यह शिकायतें सामने आ रही हैं कि अवैध सप्लाई चेन बिना किसी बाधा के फिर से चलने लगी है। कुछ लोगों का कहना है कि छोटे स्तर की कार्रवाई अवश्य हुई है, लेकिन बड़े नेटवर्क जस के तस सक्रिय हैं। यह इस ओर संकेत करता है कि पुलिस तंत्र केवल आंकड़ों के सहारे कार्रवाई दिखा रहा है, जबकि असली स्रोत अब भी अप्रभावित हैं।

सवाल यह है कि क्या प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ कागजों में उपलब्धि गिनाना है, या फिर धरातल पर वास्तविक नेटवर्क को तोड़ने की मजबूत रणनीति तैयार की जाएगी।

जनता को इंतजार कब खुलेगी कुंडली?

फिलहाल जनता की नजरें रेंज मुख्यालय और आईजी कार्यालय की ओर टिकी हैं। लोग जानना चाहते हैं कि वह कुंडली आखिर कब सार्वजनिक होगी, संदिग्ध पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी, और नशा तंत्र पर निर्णायक प्रहार की रणनीति कब दोबारा पटरी पर लौटेगी।

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