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रीवा एसपी का बड़ा एक्शन: NDPS केस में मनगवां थाने के कार्यवाहक टीआई सहित तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड, खाकी पर सख्त संदेश

रीवा। नशे के खिलाफ सख्ती की नीति को जमीन पर उतारते हुए शैलेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक रीवा ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मनगवां थाना के अपराध क्रमांक 110/26 में धारा 8, 21, 22 एनडीपीएस एक्ट एवं 5/13 औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के दौरान प्राप्त शिकायतों की विस्तृत जांच में तीन पुलिसकर्मियों का आचरण प्रथम दृष्टया भ्रष्ट एवं संदिग्ध पाया गया। जांच निष्कर्ष सामने आते ही एसपी ने तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिया, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में कार्यवाहक निरीक्षक गजेन्द्र सिंह धाकड़, आरक्षक क्रमांक 500 विजय यादव तथा आरक्षक क्रमांक 592 बृजकिशोर अहिरवार शामिल हैं। जांच रिपोर्ट में इनके कृत्य को अवचार (misconduct) की श्रेणी में रखा गया है। साथ ही पुलिस रेग्युलेशन के पैरा 64 (2) (3) के तहत सेवा की सामान्य शर्तों के उल्लंघन का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है। आदेशानुसार 23 फरवरी 2026 के अपरान्ह से तीनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, एनडीपीएस जैसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या संदिग्ध भूमिका को लेकर विभाग सख्त रुख अपना रहा है। एसपी शैलेन्द्र सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून की कार्रवाई में पारदर्शिता सर्वोपरि है और खाकी की साख से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। यही कारण है कि शिकायत मिलते ही मामले की जांच कराई गई और प्राथमिक स्तर पर दोषी पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई की गई।

आदेश के बाद पूरे रीवा पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अनुशासनात्मक कदम नहीं बल्कि पुलिस तंत्र के भीतर जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में प्रक्रिया की शुचिता और साक्ष्यों की विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता पूरे प्रकरण को प्रभावित कर सकती है।

निलंबन अवधि में संबंधित पुलिसकर्मियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। उनका मुख्यालय रक्षित केन्द्र, रीवा निर्धारित किया गया है तथा उन्हें रक्षित केन्द्र में होने वाली दैनिक गणना में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी और जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर अगली कार्रवाई तय की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम को पुलिस महकमे में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है नशे के खिलाफ जंग में किसी भी प्रकार की ढिलाई या संदिग्ध आचरण पर अब सीधी कार्रवाई होगी। अब सबकी निगाहें विभागीय जांच की अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि मामला केवल सेवा नियमों के उल्लंघन तक सीमित है या इसके पीछे और भी गंभीर तथ्य छिपे हैं।

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