
रीवा। रीवा रेंज में नशे के खिलाफ पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद साइलेंट और मेडिकल नशे का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ पुलिस लगातार दबिश जांच और गिरफ्तारी की बड़ी कार्रवाई कर रही है तो वहीं दूसरी ओर तस्कर चोरी-छिपे नए-नए हथकंडों के जरिए इस जहर को युवाओं तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब यह समस्या केवल कानून व्यवस्था का नहीं बल्कि पूरे समाज के अस्तित्व का सवाल बनती जा रही है।
रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने इस खतरनाक स्थिति को लेकर साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर समय रहते समाज नहीं जागा तो साइलेंट नशा आने वाली पीढ़ी को अंदर ही अंदर खोखला कर देगा। उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी पूरी ताकत से निभा रही है लेकिन अब अकेले पुलिस के बूते इस नेटवर्क को खत्म करना संभव नहीं है।
आईजी ने बताया कि रेंज में लगातार बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। कई तस्करों को गिरफ्तार किया गया है अवैध नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके बावजूद तस्कर अब सीधे खुलेआम नहीं बल्कि गुप्त तरीकों से गली-मोहल्लों में मेडिकल नशा परोस रहे हैं। खासतौर पर कोरेक्स जैसे नशीले कफ सिरप और अन्य दवाओं का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है जो युवाओं को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
साइलेंट नशा इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में साफ नजर नहीं आते। बच्चे और युवा धीरे-धीरे इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं और परिवार को तब तक भनक नहीं लगती जब तक स्थिति गंभीर न हो जाए। यही कारण है कि पुलिस अब केवल सख्ती नहीं बल्कि जागरूकता को भी सबसे बड़ा हथियार बना रही है।
आईजी गौरव राजपूत ने अभिभावकों से खास अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखें। यदि बच्चा अचानक व्यवहार बदलने लगे, चिड़चिड़ा हो जाए अकेले रहने लगे या पढ़ाई में रुचि कम कर दे, तो इसे नजरअंदाज न करें। ये संकेत साइलेंट नशे की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते उठाया गया कदम ही बच्चे को इस दलदल से बाहर निकाल सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन परिवारों के बच्चे पहले से नशे की चपेट में आ चुके हैं वे इसे छिपाने की गलती न करें। इलाज काउंसलिंग और सही मार्गदर्शन के जरिए बच्चों को इस बुरी लत से बाहर निकाला जा सकता है। समाज को इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना होगा तभी समाधान संभव है।
आईजी ने सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और नशा मुक्ति से जुड़े संस्थानों से भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी नशे का अवैध कारोबार चलता दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। जनता की सहभागिता से ही इस नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
रीवा रेंज में मेडिकल नशे का फैलता जाल इस बात का संकेत है कि तस्कर अब पहले से ज्यादा चालाक और संगठित हो चुके हैं। पुलिस की सख्ती के बावजूद उनका सक्रिय रहना चिंता का विषय है। ऐसे में यह लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की बन चुकी है।
अंत में आईजी गौरव राजपूत ने दो टूक कहा कि नशा एक ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे परिवार समाज और देश को अंदर से खोखला कर देता है। अगर आज सतर्कता नहीं बरती गई तो कल बहुत देर हो जाएगी। इसलिए हर व्यक्ति को जागरूक बनना होगा और इस मुहिम में अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी तभी इस साइलेंट जहर पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी।





