रीवा रेंज में विभागीय जांचों पर ताला? आईजी कार्यालय की चुप्पी से उठे तीखे सवाल, दागी कर्मियों पर कार्रवाई कब?

रीवा रेंज के पुलिस महकमे में इन दिनों अंदरखाने चल रही विभागीय जांचों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि दर्जनों प्रकरणों में जांच पूरी होने के बाद भी आरोप पत्र जारी नहीं किए गए हैं। कई फाइलें कथित रूप से आईजी कार्यालय में लंबित पड़ी हैं जिससे पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार इन मामलों में प्राथमिक जांच दस्तावेजों का संकलन और संबंधित कर्मियों से जवाब तलब की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद आरोप पत्र जारी करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही। ऐसे में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह केवल प्रशासनिक ढिलाई है या फिर कुछ दागी पुलिसकर्मियों को संरक्षण देने की कोशिश?
पुलिस विभाग की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था उसकी साख की रीढ़ मानी जाती है। यदि विभागीय जांचें वर्षों तक अधर में लटकी रहें तो इससे जनता के भरोसे पर सीधा असर पड़ता है। आरोप पत्र जारी करना किसी भी विभागीय कार्रवाई का महत्वपूर्ण चरण होता है। इसके बिना दोष तय नहीं हो सकता और न ही आरोपी को विधिवत दंड या राहत मिल सकती है।
रेंज स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व की होती है। ऐसे में निगाहें रीवा रेंज और विशेष रूप से आईजी कार्यालय पर टिकी हैं। क्या लंबित मामलों की समयबद्ध समीक्षा कर आरोप पत्र जारी किए जाएंगे? या फिर फाइलें यूं ही कार्यालयों में पड़ी रहेंगी?
रीवा में पुलिस महकमे से जुड़े जानकारों का कहना है कि लंबित जांचें विभाग के भीतर भी असंतोष का कारण बन रही हैं। ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी चाहते हैं कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि पुलिस की छवि बनी रहे। वहीं यदि कोई कर्मचारी निर्दोष है तो उसे भी अनावश्यक मानसिक दबाव से राहत मिलनी चाहिए।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन प्रकरणों की निगरानी के लिए कोई समयसीमा तय की गई है? यदि जांच पूरी हो चुकी है तो आरोप पत्र जारी करने में देरी का कारण क्या है? पारदर्शिता के अभाव में अटकलें लगना स्वाभाविक है।
पुलिस विभाग कानून व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा संभालता है। ऐसे में विभाग के भीतर ही यदि कार्रवाई की प्रक्रिया अस्पष्ट दिखाई दे तो यह व्यापक स्तर पर संदेश देता है। प्रशासनिक जवाबदेही और स्पष्ट निर्णय ही ऐसी परिस्थितियों में विश्वास बहाल कर सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि आईजी कार्यालय इन लंबित मामलों पर क्या रुख अपनाता है। क्या जल्द ठोस कदम उठाकर विभागीय अनुशासन को सुदृढ़ किया जाएगा या फिर यह मुद्दा आगे भी सवालों के घेरे में बना रहेगा? रीवा रेंज में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग लगातार तेज हो रही है।





