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रीवा रेंज में कंटेनर कांड पर नए सवाल: 20 लाख की चर्चा के बीच संदिग्ध पुलिसकर्मियों की सूची का क्या हुआ?

रीवा .कथित कंटेनर कांड अब महज एक वाहन की जांच या अवैध शराब की चर्चा तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह पूरे पुलिस तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है। शहर में चर्चा है कि भारी मात्रा में शराब से जुड़ा एक कंटेनर रोका गया लेकिन उसके बाद ठोस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई। यदि कार्रवाई हुई तो दस्तावेज सामने क्यों नहीं आए? और यदि नहीं हुई तो 20 लाख रुपये की कथित सेटिंग की बात आखिर कैसे फैल गई?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार कंटेनर को संदिग्ध परिस्थितियों में रोका गया था। आरोप है कि कथित तौर पर 20 लाख रुपये की डील के बाद मामला शांत हो गया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन यह चर्चा अब आमजन के बीच गहराई से फैल चुकी है। सोशल मीडिया से लेकर बाजार चौक तक एक ही सवाल क्या सच्चाई सामने आएगी?

इसी बीच एक और बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। कुछ समय पहले रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) द्वारा यह कहा गया था कि उनके पास ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची है जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल बताए जा रहे हैं। उस बयान ने उस समय पुलिस महकमे में हलचल मचा दी थी। अब लोग पूछ रहे हैं वह सूची कहां गई? क्या उस पर कोई कार्रवाई हुई? यदि सूची मौजूद थी तो कितने नामों की जांच हुई और परिणाम क्या रहा?

सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि संदिग्ध पुलिसकर्मियों की सूची सच में थी तो उसे सार्वजनिक करना या कम से कम उसके आधार पर हुई कार्रवाई की जानकारी देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अन्यथा यह बयान केवल चेतावनी भर बनकर रह गया। कंटेनर कांड के बीच उस सूची का जिक्र फिर तेज हो गया है और लोग दोनों मामलों को जोड़कर देख रहे हैं।

रीवा रेंज के अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान सख्ती से चल रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैहर पुलिस अधीक्षक ने भी कंटेनर प्रकरण को मनगढ़ंत बताते हुए पुलिस की छवि खराब करने की साजिश करार दिया है। लेकिन सवाल यह है कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो फिर सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?


स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद कुछ इलाकों में शराब की पैकारी आज भी जारी है। आम लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि अधिकृत दुकानों के अलावा भी शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में प्रशासन से सीधा सवाल है क्या प्रतिबंधित क्षेत्र में पूरी तरह पैकारी बंद है? क्या केवल अधिकृत दुकानों से ही बिक्री हो रही है? यदि हां तो जमीनी शिकायतें क्यों मिल रही हैं?


कंटेनर कांड और संदिग्ध पुलिसकर्मियों की कथित सूची दोनों मुद्दे अब रीवा रेंज की साख से जुड़ चुके हैं। जनता जानना चाहती है कि 20 लाख की चर्चा का आधार क्या है, सूची पर क्या कार्रवाई हुई और अवैध गतिविधियों पर अंकुश की वास्तविक स्थिति क्या है।


जब तक इन सवालों के स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब सामने नहीं आते तब तक विवाद की गूंज थमने वाली नहीं। मैहर में चर्चा तेज है और अब निगाहें प्रशासनिक पारदर्शिता पर टिकी हैं क्या सच सामने आएगा या सवाल यूं ही तैरते रहेंगे?

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