भोपालमध्य प्रदेशरीवा

रीवा PWD में रिश्वत का खेल? बिल पास कराने के लिए कथित लेन-देन की चर्चा तेज

रीवा.विंध्य अंचल में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के रीवा कार्यालय में कथित तौर पर चढ़ोतरी संस्कृति गहराती जा रही है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यहां बिना लेन-देन के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। ठेकेदारों और संबंधित पक्षों का आरोप है कि बिल पास कराने से लेकर माप पुस्तिका में एंट्री और भुगतान की प्रक्रिया तक हर कदम पर इशारा साफ रहता है रिवाज निभाइए तभी काम बनाइए।

सूत्रों के मुताबिक दफ्तर में पदस्थ एक बाबू जिन्हें कर्मचारी पांडेय बाबू कहकर पुकारते हैं कथित तौर पर बिना सेटिंग के काम करने को तैयार नहीं होते। आरोप यह भी है कि अगर कोई ठेकेदार लेन-देन से इंकार कर दे तो उसकी फाइल हफ्तों तक टेबल से टेबल भटकती रहती है। वहीं संकेत मिलते ही वही फाइल पंख लगाकर दौड़ पड़ती है। यह खेल केवल एक टेबल तक सीमित नहीं बताया जा रहा बल्कि बाबू से लेकर लेखा शाखा तक कथित सांठगांठ की चर्चा है।

रीवा जिले में सड़कों के निर्माण और मरम्मत कार्य पहले ही सुस्त रफ्तार से चल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में गड्ढों से भरी सड़कों और अधूरे भवनों की शिकायतें आम हैं। ऐसे में यदि विभाग के भीतर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हों तो विकास की गुणवत्ता और गति दोनों पर सीधा असर पड़ना तय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब फाइलें ही चढ़ोतरी के सहारे चलेंगी तो काम की ईमानदारी और मजबूती पर भरोसा कैसे किया जाए?

ठेकेदारों का दावा है कि भुगतान में देरी का सबसे बड़ा कारण यही अनकहा नियम है। समय पर बिल पास न होने से छोटे ठेकेदार आर्थिक दबाव में आ जाते हैं। मजदूरों का भुगतान अटकता है और निर्माण कार्य ठप पड़ जाते हैं। नतीजा जनता को समय पर सड़क पुल और सरकारी भवन नहीं मिल पाते। सवाल उठ रहा है कि आखिर विकास की गाड़ी को कौन रोक रहा है?

विभागीय सूत्रों की मानें तो शिकायतें अनौपचारिक रूप से कई बार सामने आईं लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। कारण साफ है कथित तौर पर सब कुछ सिस्टम के भीतर ही सेट है। यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल है बल्कि सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता पर भी गंभीर चोट है।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी संकेत दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि PWD जैसे अहम विभाग में भ्रष्टाचार पनप रहा है तो इसका सीधा नुकसान जनता को भुगतना पड़ेगा। विंध्य क्षेत्र के विकास का सपना तभी साकार होगा जब दफ्तरों में ईमानदारी की नींव मजबूत हो।

अब निगाहें जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या रीवा के PWD कार्यालय में कथित चढ़ोतरी संस्कृति पर अंकुश लगेगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर फाइलें यूं ही रिश्वत की भेंट चढ़ती रहेंगी? जवाब आने वाला समय देगा लेकिन फिलहाल विंध्य की धरती पर विकास से ज्यादा चर्चा लेन-देन की है।

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